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महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वो कान में टेलीफोन लगाकर खड़े दिख रहे हैं. इसे शेयर करने वालों ने दावा किया है कि गुजरात (Gujrat) में पहला टेलीफोन साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) में लगाया गया था.
दावे में क्या लिखा है यूजर्स ने?: ये फोटो शेयर कर कई यूजर्स ने लिखा, ''आज एक नई जानकारी यह मिली कि गुजरात में सबसे पहला टेलीफोन किसी बड़े उद्योगपति मिल मालिक के घर पर नहीं बल्कि साबरमती आश्रम में गांधीजी के टेबल पर लगा था.''
दावे में ये भी लिखा गया है कि ये टेलीफोन अंग्रेजों ने लाखों रुपये खर्च करके लगवाया था, ताकि अंग्रेज सीधे गांधीजी से बात कर सकें
वायरल दावे से जुड़े क्वेरी हमारी WhatsApp टिपलाइन पर भी आई है. ऐसे और भी पोस्ट के आर्काइव आप यहां, यहां और यहां देख सकते हैं.
सच क्या है?: वायरल दावा भ्रामक है.
हमें ये तस्वीर Getty Images पर मिली. यहां दी गई जानकारी के मुताबिक, ये फोटो 1941 में महाराष्ट्र के सेवाग्राम में ली गई थी.
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, गुजरात पहली टेलीफोन लाइन 1897 में अहमदाबाद में बिछाई गई थी और तब इसके 34 ग्राहक थे.
यहां ये भी ध्यान देना जरूरी है कि राज्य में पहली बार टेलीफोन लगने के करीब 17 साल बाद, साल 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे.
कहां की है ये तस्वीर?: फोटो पर एक साधारण सा रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यही फोटो Getty Images पर मिली.
फोटो कैप्शन में लिखा था, ''भारतीय राजनेता और कार्यकर्ता मोहनदास करमचंद गांधी (1869 - 1948) सेवाग्राम आश्रम में फोन पर, भारत, 1941."
तस्वीर खींचने की तारीख 1 जनवरी 1941 बताई गई है.
(सोर्स: स्क्रीनशॉट/Getty Images)
सेवाग्राम आश्रम महाराष्ट्र में स्थित है. यहां महात्मा गांधी 1936 से लेकर 1948 तक रुके थे.
आश्रम की वेबसाइट पर इस जगह का वीडियो भी उपलब्ध है.
वीडियो के 10 मिनट 16वें सेकेंड पर बताया गया है कि भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने गांधी से बात करने के लिए ''अपनी सुविधा के लिए'' आश्रम में एक टेलीफोन लगवाया था.
यहां से पता चलता है कि ये दावा भ्रामक है, क्योंकि गांधी की तस्वीर गुजरात के बजाय महाराष्ट्र की है.
भारत में टेलीफोन का इतिहास: कलकत्ता बीएसएनएल वेबसाइट के मुताबिक, भारत सरकार ने बॉम्बे (मुंबई), कलकत्ता (कोलकाता), मद्रास (चेन्नई), कराची और अहमदाबाद में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने के लिए इंग्लैंड की ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड को लाइसेंस दिया था.
गवर्नर जनरल काउंसिल के मेंबर मेजर ई बैरिंग ने 28 जनवरी 1882 को कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने की घोषणा की थी.
सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) की वेबसाइट के मुताबिक, ''इसके (टेलीफोन) के आविष्कार के 7 साल के अंदर, बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किए गए.''
वेबसाइट में ये भी कहा गया है कि ऑटोमैटिक टेलीफोन भारत में पहली बार 1914 में शिमला में आए थे.
(सोर्स: स्क्रीनशॉट/MIB)
ETV Bharat की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद में एक टेलीफोन एक्सचेंज के अलावा, कोलकाता, मद्रास और बॉम्बे टेलीफोन सेवाओं के शुरुआती सब्सक्राइबर बन गए.
अहमदाबाद में टेलीफोन सेवाएं: हमें DNA India का एक आर्टिकल मिला, जिसका टाइटल था, "Ahmedabad should be a place where life grows: BV Doshi".
आर्टिकल के मुताबिक, बॉम्बे टेलीफोन कंपनी ने 1897 में अहमदाबाद में अपनी सेवाएं शुरू की थीं.
कीवर्ड सर्च करने पर हमें यही जानकारी अहमदाबाद नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मिली.
वेबसाइट में अहमदाबाद में घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है.
(सोर्स: स्क्रीनशॉट/वेबसाइट)
इसके बाद, हमें Indian Culture की वेबसाइट पर गुजरात सरकार का साल 1984 में प्रकाशित एक गजट भी मिला.
'टेलीफोन' सेक्शन के मुताबिक, गजट में कहा गया है कि ''17 जुलाई 1897 को पंचकुवा गेट के पास अहमदाबाद शहर के पहले मैग्नेटो एक्सचेंज को शुरू किया गया था और इसके 34 सब्सक्राइबर थे.
ये जानकारी 488 पेज पर थी.
(सोर्स: स्क्रीनशॉट/वेबसाइट/Indian Culture)
निष्कर्ष: अहमदाबाद में टेलीफोन सेवाएं 1897 में शुरू की गईं थीं यानी महात्मा गांधी के भारत वापसी से सालों पहले. साफ है कि वायरल दावा गलत है.
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