
advertisement
सोशल मीडिया पर मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर सड़कों पर प्रोटेस्ट करते लोगों का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो को शेयर करते हुए कुछ यूजर्स ने इसे अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स आने के बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों का बताकर शेयर किया है.
क्या यह दावा सही है ? नहीं, यह दावा सही नहीं है.
यह वीडियो असली नहीं है बल्कि इसे AI की मदद से बनाया गया है.
वायरल वीडियो का एप्सटीन फाइल्स से कोई संबंध नहीं है.
हमने सच का पता कैसे लगाया ? हमने वायरल वीडियो पर गूगल लेंस की मदद से इमेज सर्च ऑप्शन का इस्तेमाल किया. हमारी सर्च में हमें यही वीडियो elnaz555 नाम की एक इंस्टाग्राम यूजर की इस पोस्ट में मिला.
इस पोस्ट के कैप्शन में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए लिखा था, "उस पल ने मुझे AI का इस्तेमाल करके आर्ट की मदद से उस सीन को फिर से बनाने के लिए प्रेरित किया. यह पीस असलियत का रिप्लेसमेंट नहीं है! यह उसकी एक झलक है." (अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद)
असल पोस्ट के कैप्शन में इस वीडियो को AI की मदद से बनाया हुआ बताया गया था.
(सोर्स - स्क्रीनशॉट/इंस्टाग्राम)
यहां से अंदाजा लगाकर हमने इस वीडियो को AI की पहचान करने वाले टूल Deepfake-o-Meter पर भी चेक किया, वहां अलग-अलग टूल्स ने इस वीडियो के AI से बने होने की प्रबल संभावना जताई.
Deepfake-o-Meter ने इस वीडियो के AI से बने होने की संभावना जताई है.
(सोर्स - स्क्रीनशॉट)
इसके सिवा हमने इस वीडियो को AI से बने कॉन्टेंट की पहचान करने वाले एक अन्य टूल TruthScan पर भी चेक किया. यहां भी इस वीडियो के AI से बने होने की 99 प्रतिशत संभावना जताई गई.
(सोर्स - स्क्रीनशॉट/TruthScan)
निष्कर्ष: AI से बने पुराने वीडियो को एप्सटीन फाइल से जोड़कर भ्रामक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.
(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर 9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)