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सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर हो रहे सोशल मीडिया पोस्ट और न्यूज रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने बढ़ते गुमशुदगी के मामलों को लेकर अलर्ट जारी किया है. पोस्ट में बताया गया है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 800 से ज्यादा गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं, जो कि एक चौंकाने वाला आंकड़ा है.
सोशल मीडिया पर इन आंकड़ों को इस तरह से शेयर किया जा रहा है जिससे लग सकता है कि अचानक इतने लोग राजधानी से गायब हो गए और पहली बार ऐसा हुआ है. लेकिन, पिछले सालों के आंकड़ों को देखा जाए तो कुछ और ही तस्वीर सामने आती है. पर उससे पहले नजर डालते हैं सोशल मीडिया पर हो रहे दावों पर.
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पोस्ट का अर्काइव यहां देखें
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आम आदमी पार्टी (AAP) के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से इस बारे में पोस्ट कर गृह मंत्रालय पर सवाल उठाए गए.
क्या दिल्ली पुलिस ने जारी किया है गुमशुदगी के मामलों को लेकर कोई अलर्ट?
दिल्ली पुलिस की तरफ से ऐसा कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ है. 15 दिन में 800 से ज्यादा गुमशुदगी के मामलों का आंकड़ा न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट से आया है. यहीं से तमाम न्यूज रिपोर्ट्स में इस आंकड़े का इस्तेमाल ऐसे किया गया, जैसे इसे दिल्ली पुलिस ने किसी चेतावनी की तरह जारी किया हो.
PTI की रिपोर्ट
दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट या फिर सोशल मीडिया अकाउंट पर हमें ऐसा कोई अलर्ट नहीं मिला. इस कथित अलर्ट की सच्चाई जानने के लिए हमने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया.
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर भी एक वीडियो जारी कर स्पष्टीकरण दिया है कि पिछले सालों की तुलना में इस साल गुमशुदगी के मामलों को लेकर कोई वृद्धि दर्ज नहीं हुई है.
अब सवाल ये उठता है कि दिल्ली पुलिस ने ये आंकड़े जारी नहीं किए हैं तो ये आंकड़े आए कहां से ? दरअसल, 6 राज्यों की पुलिस का एक आधिकारिक पोर्टल है. जहां हर दिन दर्ज होने वाले गुमशुदगी के मामलों, अज्ञात शवों, आदतन अपराधियों, चोरी हुई गाड़ियों, चोरी हुए मोबाइल आदि का डेटा देखा जा सकता है. ये जानकारी कोई भी आम नागरिक ले सकता है. दिल्ली के अलावा, हरियाणा, पंजाब, चंदीगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश के आंकड़े भी इस पोर्टल पर देखे जा सकते हैं.
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यहां गुमशुदगी के आंकड़े चेक किए, तो पता चला कि 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में गुमशुदगी के 1056 मामले दर्ज किए गए. 831 लोगों को पुलिस ढूंढ नहीं पाई.
1 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 के बीच गुमशुदगी के 800 से ज्यादा मामले सामने आए ये दावा सच है.
क्या पहली बार दर्ज हुए इतने बड़े पैमाने पर गुमशुदगी के मामले ?
हमने पिछले 5 सालों के इस दौरान के गुमशुदगी के आंकड़े चेक किए. यानी 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच के.
1 जनवरी 2025 से 15 जनवरी 2025 के बीच - 922 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए. 557 लोगों को पुलिस ढूंढ नहीं पाई.
1 जनवरी 2024 से 15 जनवरी 2024 के बीच - गुमशुदगी के कुल 989 मामले दर्ज हुए. 586 मामलों में पुलिस लोगों को ढूंढ नहीं पाई.
1 जनवरी 2023 से 15 जनवरी 2023 के बीच - 1258 लोगों की गुमशुदगी दर्ज हुई. इनमें से 725 लोगों को पुलिस ढूंढ नहीं पाई.
1 जनवरी 2022 से 15 जनवरी 2022 के बीच - 937 लोगों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज हुई.0 477 लोगों को पुलिस ढूंढ नहीं पाई.
1 जनवरी 2021 से 15 जनवरी 2021 के बीच 1088 लोगों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज हुई. 556 लोगों को पुलिस ढूंढ नहींं पाई.
हर साल दर्ज होने वाले गुमशुदगी के मामलों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि पिछले 5 सालों में दिल्ली में सालाना 17,000 से लेकर 25 हजार के बीच लोग गुमशुदा होते हैं. ये आंकड़े साबित करने के लिए काफी हैं कि 2026 के पहले 15 दिनों में दर्ज हुए मामले अब तक के सर्वाधिक नहीं है. ये आंकड़े दिल्ली पुलिस की तरफ से ही जारी RTI Manual से लिए गए हैं.
2025 के आंकड़े अभी दिल्ली पुलिस या NCRB की तरफ से जारी नहीं हुए हैं.
अलर्ट से जुड़े पोस्ट शेयर करने से पहले सावधान रहना क्यों जरूरी ?
ये सवाल उठ सकता है कि अगर 800 से ज्यादा लोगों के गुमशुदा होने का आंकड़ा सच है, तो फिर अलर्ट से जुड़ा पोस्ट शेयर करने में गलत क्या है ?
इसमें पहली बात तो गलत ये है कि दिल्ली पुलिस ने ऐसा कोई अलर्ट जारी नहीं किया है, लिहाजा ये एक फेक अलर्ट है. इससे ज्यादा जरूरी पहलू ये है कि अकसर चोरी, गुमशुदगी, किडनैपिंग से जुड़े मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना का काफी खतरनाक नुकसान समाज में देखने को मिलता है.
उदाहरण के तौर पर देखें, तो बच्चा चोरी की अफवाहों से जुड़े मामलों में ये सामने आया है. जब घटनाओं को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया और खामियाजा बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ा. वो लोग जिनका अपराध से कोई संबंध नहीं था उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा.
पिछले साल भी ऐसा ही मामला उत्तरप्रदेश में भी सामने आया. जहां चोरी की कुछ मामूली घटनाओं को सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया. नतीजा ये हुआ कि कई बेकसूर ग्रामीणों के साथ उत्तरप्रदेश के अलग-अलग गावों में हिंसा हुई.
ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में 15 दिन में 800 से ज्यादा लोगों का गुमशुदा होना अब एक आम आंकड़ा बन चुका है. पिछले 10 सालों में इन घटनाओं पर बड़े पैमाने पर लगाम लगती भी नहीं दिख रही. बड़ी संख्या में लोग ऐसे होते हैं जिनकी गुमशुदगी की गुत्थी पुलिस सुलझा ही नहीं पाती. पर इस मामले को जिस सनसनीखेज तरीके से फेक अलर्ट के साथ शेयर किया जा रहा है, वो एक नई समस्या पैदा कर सकता है, जैसा कि हमने बच्चा चोरी की घटनाओं से जुड़े मामलों में देखा है.
निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर किया जा रहा ये दावा सच नहीं है कि दिल्ली पुलिस ने गुमशुदगी के बढ़ते मामलों को लेकर कोई अलर्ट जारी किया है.
(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर 9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)