
advertisement
27 अगस्त 2024 के दिन हरियाणा के चरखी दादरी में खुद को गौरक्षक बताने वाली एक भीड़ ने पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मजदूर साबिर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. पति की मौत के बाद शकीला अपने गृह राज्य वापस चली गईं, जहां उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर अपनी स्थिति बताई. पश्चिम बंगाल सरकार ने शकीला को मंत्रालय में अस्थाई पद पर नियुक्ति दी, जिससे वो खुद का और अपनी बच्ची का पालन पोषण कर सकें.
पश्चिम बंगाल में इस साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ, शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बीजेपी सरकार में आई. अब शकीला को सरकार की तरफ से 9 जून 2026 को जारी किया गया आदेश मिला है. इस आदेश में लिखा है कि शकीला की नौकरी अस्थाई थी, और चूंकि सरकार बदलने पर पिछली सरकार का मंत्रालय भी भंग हो गया है, इसलिए अब उनकी नौकरी भी नहीं रहेगी.
पश्चिम बंगाल की तरफ से जारी हुआ आदेश
सोर्स : Accessed by The Quint
द क्विंट से बातचीत में शकीला ने कहा कि उनकी बेटी 5 साल की है. इसी साल वो अपनी बेटी का दाखिला इसी नौकरी के सहारे स्कूल में कराने की तैयारी कर रही थीं. लेकिन, सरकार के इस आदेश के बाद अब बच्ची की पढ़ाई तो दूर घर के जरूरी खर्चे भी कैसे चलेंगे इसका कोई जवाब फिलहाल शकीला के पास नहीं है.
शकीला के पति मृतक साबिर अपनी बेटी के साथ
फोटो : Accessed by The Quint
शकीला आगे बताती हैं कि वो 24 साउथ परगना के बसंती स्थित जिस विभाग में कार्यरत थीं, वहां के अधिकारियों ने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया कि नौकरी खत्म होने का कारण क्या है. बकौल शकीला, अधिकारियों का कहना है कि 'आदेश ऊपर से आया है.'
ये नौकरी शकीला को ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद मिली थी. क्या वो नवनियुक्त मुख्यमंत्री के पास अपनी समस्या लेकर जाएंगी ? इस सवाल के जवाब में शकीला कहती हैं कि जब जब हरियाणा की घटना हुई थी तब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनकी ममता बनर्जी तक पहुंचने में मदद की थी. फिलहाल उन्हें ऐसा कोई रास्ता नहीं दिख रहा, कोई मददगार नहीं दिख रहा, जिसकी सहायता से वो नए सीएम तक पहुंचकर अपनी बात रख सकें.
हरियाणा में क्या हुआ था ? : 27 अगस्त 2024 के दिन एक भीड़ साबिर के घर आती है, इस शक में की उनके घर गाय का मीट पका है. घर से मीट निकालकर चेक करने पर भी भीड़ को तसल्ली नहीं होती. कुछ वक्त के बाद साबिर को किसी बहाने से कुछ लोग गांव से बाहर लेकर जाते हैं जहां बेरहमी से उसके साथ मारपीट होती है, जिसके बाद साबिर की मौत हो गई. प्रशासन ने साबिर के घर से बरामद हुए मीट को फरीदाबाद की लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा. साबिर की मौत के 2 महीने बाद जब लैब के रिजल्ट आए तो पता चला कि वो मीट गाय का नहीं था.
27 अगस्त को साबिर के साथ हुई मारपीट का वीडियो
साबिर अपनी पत्नी 1 साल की बच्ची के साथ चरखी दादरी में रहते थे. साबिर की पत्नी का परिवार, उनके ससुर सुजाउद्दीन भी यहीं रहा करते थे. जिस वक्त साबिर के साथ मारपीट हो रही थी, उनके ससुर को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था.
फोटो : The Quint
अफवाह का नुकसान सिर्फ साबिर की मौत के रूप में सामने नहीं आया, इलाके में रहने वाले दर्जनों मुस्लिम प्रवासी मजदूरों को भी अपना रोजगार छोड़कर रातों-रात चरखी दादरी छोड़ना पड़ा. इस मामले पर द क्विंट की ग्राउंड रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है.
(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर 9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)