
advertisement
सड़क किनारे चाय और पानी की दुकानों पर काम करते, पॉलिश पेटी लेकर सड़कों पर घूमते मासूमों को अक्सर आपने लोगों 'छोटू' नाम से बुलाते सुना होगा. लेकिन इन छोटुओं की छोटी-छोटी आंखों में सपने बड़े-बड़े हैं.
कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो कोई बिजनेसमैन. मजबूरी और जिंदगी के हालातों से सपने भले ही इनके दिलों में दबे रहते हैं लेकिन द क्विंट ने सड़क पर पलने वाले इन बच्चों से जानने कि कोशिश की मजबूरी की दुनिया से अलग इनकी आंखों में कौन से सपने पल रहे हैं.
आप भी देखिए ये वीडियो और जानिए- किसके दिल में दबा है कौन सा सपना?
विश्व बालश्रम निषेध दिवस के मौके पर इस खबर को पुनः प्रकाशित किया जा रहा है. पहली बार यह खबर 12 जून 2016 को प्रकाशित की गई थी.