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वाराणसी: क्यों बह गई गंगा किनारे बन रही 11 करोड़ की नहर?

परियोजना पर शुरू में यह दावा किया गया था कि रेत जमा क्षेत्र में बाईपास चैनल का होना सही नहीं है

क्विंट हिंदी
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<div class="paragraphs"><p>बाईपास चैनल परियोजना गंगा में जलप्रलय हो गई</p></div>
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बाईपास चैनल परियोजना गंगा में जलप्रलय हो गई

(फोटो: क्विंट हिंदी)

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वाराणसी में घाटों के नजदीक बनाई गई एक बाईपास चैनल परियोजना हाल ही में गंगा में समा गई. 11 करोड़ रुपये की परियोजना पर शुरू में यह दावा किया गया था कि रेत जमा क्षेत्र में बाईपास चैनल का होना सही नहीं है.

यह परियोजना इस साल मार्च में शुरू हुई और लगभग तीन महीने में पूरी हो गई. पूर्वी तट पर गंगा के समानांतर 5.3 किमी लंबा, 45 मीटर चौड़ा और 6 मीटर गहरा बाईपास चैनल खोदा गया था.

"सिंचाई विभाग के अंतर्गत ड्रेजिंग परियोजना को लाया गया था, जहां घाट के सामने किनारे पर एक 45 मीटर चौड़ा चैनल खोदा गया और अंत में नदी से जोड़ा गया. इससे पानी के दबाव को कम करने और घाटों पर कटाव को रोकने की उम्मीद है."
दीपक अग्रवाल, वाराणसी आयुक्त
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विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की थी

पर्यावरणविदों और नदी वैज्ञानिकों ने इस कदम पर चिंता जताते हुए दावा किया था कि इससे रेत और गाद जमा होने के कारण गंगा घाटों से दूर हो सकती है.

"अगर आपको लगता है कि आप घाटों पर दबाव कम करने और चैनल की वजह से सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम होंगे, तो मुझे नहीं लगता कि यह संभव है. गंगा नदी उस चैनल को जलमग्न कर देगी. दूसरा, वेग की गति नाले के कारण नदी घटेगी जिससे घाट की तरफ रेत जमा हो जाएगी. एक डर है कि गंगा घाटों से हटकर पूर्व की ओर जाने लगेगी."
विश्वंभर नाथ मिश्रा प्रोफेसर आईआईटी बीएचयू महंत संकट मोचन

महामना मालवीय गंगा अनुसंधान केंद्र-बीएचयू के अध्यक्ष बीडी त्रिपाठी ने कहा,

''अगर कोई नहर बन गई है और वह भी रेत के जमाव वाले क्षेत्र में, तो परियोजना के पीछे के लोगों को सोचना चाहिए था कि यह चैनल कब तक जीवित रहेगा. रेत जमा क्षेत्र में नहर की योजना बनाना संभव नहीं है क्योंकि यह अंततः जलमग्न हो जाएगी"

इसके अलावा, नदी वैज्ञानिकों का मानना ​​​​है कि बाईपास चैनल गर्मियों के दौरान नदी की व्यवस्था को और खराब कर देगा.

गंगा के कायाकल्प को लेकर निशाने पर सरकार

"क्या कभी कोई पानी के बहाव को रोक पाया है? पानी अपना रास्ता खुद बनाता है. मुझे समझ में नहीं आता कि बीजेपी सरकार में किस बुद्धिजीवी ने जनता के पैसे को बर्बाद करने के लिए यह विचार दिया? क्या किसी पर्यावरणविद् या नदी वैज्ञानिक ने अपनी राय दी? क्या स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार कोई राय लेती है? उन्होंने किसी की राय नहीं ली. उनका एकमात्र मकसद जनता का पैसा लूटना, अपना खजाना भरना और चुनाव के लिए पैसे का इस्तेमाल करना है"
समाजवादी पार्टी के नेता मनोज राय धूपचंडी

कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने कहा, "गंगा नदी से छेड़छाड़ काशी वासियों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है. इससे घाटों, शहर की संस्कृति और परंपरा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

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