Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Videos Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019'चिंकी', 'चाइनीज' और नस्लवाद पर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दर्द की कहानी

'चिंकी', 'चाइनीज' और नस्लवाद पर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दर्द की कहानी

दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ नस्लीय टिप्पणी और अभद्रता का मामला सामने आया था.

Shadab Moizee
वीडियो
Published:
<div class="paragraphs"><p>राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था.</p></div>
i

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था.

फोटो: क्विंट ग्राफिक्स टीम

advertisement

"यहां तक की छोटे-छोटे बच्चे कहते हैं- 'चिंकी', 'चाइनीज' यहां से जाओ. यह देखकर दुख होता है. इतने छोटे-छोटे बच्चों की कैसे परवरिश हो रही है. उन्हें दुनिया के बारे में कुछ भी पता नहीं है. लेकिन हमारे चेहरे की बनावट की देखकर वे चाइनीज कहते हैं. जाहिर है, बच्चे ऐसी बातें अपने आप नहीं सीखते, बल्कि यह उनके आसपास के माहौल और समाज से ही आती हैं," ये कहना है अरुणाचल प्रदेश की यानी हेमी का, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा है.

दरअसल, बीते दिनों दिल्ली के मालवीय नगर में रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों ने अपने पड़ोसियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी करने (Racism) और बदतमीजी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई थी. युवतियों ने इस घटना का वीडियो बनाया जो कि वायरल हो गया. इस वीडियो में आरोपी "मोमो", "मसाज पार्लर वाली" जैसी आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियां करते नजर आ रहे हैं.

इस घटना के बाद एक बार फिर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा चर्चा में आ गया है.

'अदरिंग': एक गंभीर बीमारी

भारत में इन दिनों एक बहुत ही गंभीर बीमारी फैली हुई है, जिसे एक्सपर्ट्स 'अदरिंग' (Othering) कहते हैं. सुनने में ये शब्द थोड़ा भारी भरकम लग सकता है, लेकिन इसका मतलब बहुत सीधा और डरावना है- किसी को खुद से अलग या 'पराया' मान लेना.

जब हम किसी के लुक्स, पहनावे या खान-पान के आधार पर उसे अपने से कमतर समझते हैं, उस पर नस्लीय टिप्पणियां करते हैं या उसे लेकर अपने मन में गलत धारणाएं बना लेते हैं, तो उसे ही 'अदरिंग' कहा जाता है.

अरुणाचल प्रदेश की युवतियों का कहना है कि उनके साथ जो हुआ, वो कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि उनकी पहचान को लेकर किया गया हमला है.

‘जनाब ऐसे कैसे’ के इस एपिसोड में हम नॉर्थ ईस्ट इंडिया के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव के मुद्दे पर बात करेंगे. साथ ही आपको वहां के कुछ ऐसे लोगों से भी मिलवाएंगे, जिन्हें इस तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ा है.

"मैं कुछ नहीं कर पाई"

यांगफो पिसुम अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं और दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही हैं. द क्विंट से बातचीत में उन्होंने बताया कि किस तरह उनके साथ सरेराह दुर्व्यवहार किया गया और उन पर नस्लीय टिप्पणियां की गईंय

यांगफो पिसुम बताती हैं कि वह अपने दोस्तों के साथ ई-रिक्शा से वापस लौट रही थीं. इस दौरान कुछ बच्चों ने उनपर पानी से भरे गुब्बारे फेंकने शुरू कर दिए. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन बच्चों ने उन्हें डराने और बुरी तरह अपमानित करना शुरू कर दिया. इस दौरान उनपर नस्लीय टिप्पणियां भी की गई.

"जब मैंने गुस्से में कहा कि क्यों गुब्बारे फेंक रहे हो, तो वे मुझे चिंकी-चिंकी बोलने लगे. सारे बच्चे जमा हो गए और फिर गुब्बारे फेंकने लगे. जिसके पास गुब्बारे नहीं थे, वे छोटे-छोटे कप से मेरे ऊपर पानी फेंकने लगे. मैं कुछ नहीं कर पा रही थी, बस अपने पीजी पहुंचने तक पूरे रास्ते रोती रही."
यांगफो पिसुम

"हम विविधता की बात करते हैं, लेकिन स्वीकारते नहीं"

अरुणाचल की छात्रा यामी हेमी कहती हैं कि वह बहुत उम्मीद के साथ दिल्ली आई थीं. लेकिन उनकी उम्मीदों को झटका तब लगा, जब उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा. वे कहती हैं, "भारत में बहुत विविधता है. लेकिन दुखद बात ये है कि हम उस विविधता का सम्मान नहीं करते, उसे स्वीकारते नहीं है."

"आजकल नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ मौखिक दुर्व्यवहार और उनके शारीरिक बनावट को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करना आम बात होती जा रही है. हालांकि, इन घटनाओं के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा रहा है."
यामी हेमी

मालवीय नगर में हुई घटना पर बात करते हुए यामी कहती हैं कि अगर पुलिस नहीं होती तो उन लड़कियों के साथ मारपीट भी हो सकती थी.

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

"कोई चिंकी बोलता है, कोई नेपाली"

दयाम सिंह कॉलेज में पढ़ने वाले सोनम ताशी मूल रूप से अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग के रहने वाले हैं. नॉर्थ ईस्ट के लड़कों को किस तरह का भेदभाव का सामना करना पड़ा है, इस पर वे कहते हैं, "महिलाओं की तुलना में लड़कों को इतनी दिक्कतें तो नहीं होती हैं. बस हमारे लुक्स की वजह से कोई हमें चिंकी बोलता है, तो कोई नेपाली कहता है."

मणिपुर के रहने वाले वुइथुबोउ बताते हैं कि हाल ही में जब वे उत्तराखंड गए थे तो उन्हें भी नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा था.

फरवरी 2014 में जब दिल्ली के लाजपत नगर में अरुणाचल के छात्र नीडो तानिया की पीट-पीटकर हत्या हुई, तो पूरा देश दहल गया था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने एमपी बेजबरुआ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. कमेटी ने कई सुझाव दिए थे.

सवाल है कि उन सुझावों का क्या हुआ और आज भी नॉर्थ ईस्ट के लोगों को नस्लीय भेदभाव का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

मणिपुर रहने वाले पोंटिंग, नॉर्थ ईस्ट के लोगों की सुरक्षा के लिए 'एंटी-रेशियल लॉ' यानी नस्लवाद विरोधी कानून बनाने की मांग करते हैं. इसके साथ ही वे कहते हैं कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आ सकता, इसके लिए हमें जड़ों से काम करना होगा.

बेजबरुआ कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि "NCERT की किताबों में नॉर्थ-ईस्ट के इतिहास और वहां की वीरगाथाओं को शामिल करना चाहिए. जब तक देश के बच्चों को स्कूल के दिनों (नर्सरी से 12वीं तक) से ही यह नहीं सिखाया जाएगा कि नॉर्थ-ईस्ट भी भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां के लोगों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी थी, तब तक समाज की 'ग्राउंड रियलिटी' और ये संकीर्ण सोच नहीं बदलेगी."

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT