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वीडियो एडिटर: अभिषेक शर्मा
कई प्रवासी परिवारों की तरह मोहम्मद हुसैन भी 17 जनवरी को अपने परिवार के साथ बेंगलुरु के बेल्लांदुर में रहने के लिए आए. वो एक अच्छे भविष्य की उम्मीद में यहां आए थे. लेकिन अचानक उनसे उनका घर छीन गया, उनका कहना है कि उन्हें बांग्लादेश से आया हुआ ‘घुसपैठिया’ बोलकर निशाना बनाया जा रहा है. इस वजह से उनकी झोपड़ी बिना किसी नोटिस के तोड़ दी गई.
बेघर होने की वजह से हुसैन की पत्नी और बच्चे फिलहाल किसी और जगह चले गए हैं, हुसैन का कहना है कि इन सभी दिक्कतों के कारण वो काम पर भी नहीं जा पाए और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.
स्थानीय लोगों का दावा है कि अवैध घोषित कर दिए गए घरों की तोड़फोड़ से पहले न तो लोगों को नोटिस दिया गया और न ही ये पता किया गया कि वो किस देश के रहने वाले हैं. कोलकाता के रहने वाले रहीम खान बताते हैं कि पुलिस आई थी, उन्होंने आईडी भी ली लेकिन दूसरे दिन आकर सभी घर तोड़ दिए.
कई दिहाड़ी मजदूर खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं, लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ रहने में ही नहीं बल्कि नौकरी ढूंढने में भी दिक्कतें आ रही हैं, वो आमदनी के लिए जूझ रहे हैं.
असम से आए रहीम-उद-दीन बरबरिया हाउस कीपिंग स्टाफ हैं, उनका कहना है कि वो अपने घर का सामान तक नहीं बचा पाए, उनका दावा है कि झोपड़ी तोड़ने की कार्रवाई में उनके घर का कुछ भी नहीं बचा.