Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Videos Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019बेंगलुरु का ‘शाहीन बाग’:एक-दूसरे का जज्बा ऐसे बढ़ा रहीं महिलाएं

बेंगलुरु का ‘शाहीन बाग’:एक-दूसरे का जज्बा ऐसे बढ़ा रहीं महिलाएं

बेंगलुरु के बिलाल बाग में CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन 

अर्पिता राज
वीडियो
Published:
बेंगलुरु के बिलाल बाग में लोग CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं
i
बेंगलुरु के बिलाल बाग में लोग CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं
(फोटो: क्विंट हिंदी)
✕

advertisement

वीडियो एडिटर: आशुतोष भारद्वाज

बेंगलुरु के तनेरी रोड पर हजरत बिलाल मस्जिद के करीब बिलाल बाग से उठते नारे मीलों दूर तक सुनाई देते हैं. 8 फरवरी से बेंगलुरु के बिलाल बाग में महिलाएं और छात्र CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें देखकर आस-पास के मुस्लिम बहुल इलाके के लोग अब प्रदर्शन में शामिल होने लगे हैं.

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

19 साल की बी-कॉम की छात्र सायमा परवीन हर शाम प्रदर्शन में शामिल होने आती हैं. उनका कहना है कि वो इन महिलाओं के जज्बे को देखकर बहुत प्रभावित हुई हैं और उस दिन से वो लगातार प्रदर्शन में आती हैं और नारे लगाती हैं. साथ ही वो प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को खाना भी परोसती हैं.

जब मैं यहां आई तो मैंने देखा कि ये प्रदर्शन कितना बड़ा हो गया है. ये देखकर मैं प्रभावित हुई और उस दिन से मैंने यहां आना शुरू कर दिया. मुझे यहां बैठी महिलाओं से हिम्मत मिली कि ‘हां मुझे भी यहां आकर अपनी आवाज उठानी चाहिए और हक के लिए लड़ना चाहिए.’
सायमा परवीन, छात्र, बी-कॉम

मिलिए बिलाल बाग की 'दादी' वहीदा से

'बिलाल बाग की दादी' या 'तिरंगा आपा' के नाम से मशहूर वहीदा 41 साल की हैं. हर शाम वो भी प्रदर्शन में हिस्सा लेने आती हैं. वो कहती हैं- 'पैसा कमाने से ज्यादा जरूरी है समाज के लिए काम करना'.

20 साल पहले वहीदा के पति की मृत्यु हो गई थी, तब से वहीदा ही अपने परिवार में कमाने वाली हैं. वो कहती है कि 'अल्लाह हमारा ध्यान रखेगा.'

प्रदर्शनकारियों को फल और पानी देते हुए वहीदा कहती हैं- 'मैं यहां हर रोज आती हूं क्योंकि मुझे यहां अच्छा लगता है. यहां एक समाज की भावना है. हम सब साथ खड़े हैं.'

CAA के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर सायमा कहती हैं कि ‘उन्हें नहीं लगा था कि ये प्रदर्शन इतने बड़े स्तर पर होगा.’

सायमा गर्व से कहती हैं कि- 'उन्होंने हमें कम आंका है कि औरतें सिर्फ घर में ही रहती हैं, उन्होंने शेरनियों को जगा दिया है, यहां कि औरतों को कम नहीं आंके. यहां हर औरत एक शेरनी है रानी चिन्नम्मा की ज्वाला हर किसी में जल रही है.'

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT