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शिमला: स्कूल में ईद मिलन पर रोक और संजौली मस्जिद विवाद के पीछे एक कनेक्शन

देवभूमि संघर्ष समिति ने स्कूल को चेतावनी दी थी कि अगर फैसला वापस नहीं लिया तो वे स्कूल के बाहर प्रदर्शन करेंगे.

अवनीश कुमार & Shadab Moizee
राजनीति
Updated:
<div class="paragraphs"><p>स्कूल में ईद सेलिब्रेशन पर रोक</p></div>
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स्कूल में ईद सेलिब्रेशन पर रोक

फोटो: द क्विंट 

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"हमारे लिए बच्चों की सेफ्टी सबसे अहम है. इसलिए हमने ईद सेलिब्रेशन के कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया."

किसने सोचा होगा कि भारत में शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले एक स्कूल को अपने यहां किसी फेस्टिवल के सेलिब्रेशन पर रोक लगाते हुए इस तरह का मैसेज लिखना पड़े. लेकिन ऐसा हुआ है. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में. वो भी किसी सरकारी आदेश या मौसम की खराबी की वजह से नहीं बल्कि एक हिंदूवादी संगठन की धमकी की वजह से.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, शिमला के ऑकलैंड हाउस स्कूल ने ईद से पहले 28 मार्च 2025 को ईद सेलिब्रेशन के लिए क्लास के टीचर-पेरेंट्स वॉट्सएप ग्रुप में एक मैसेज भेजा था. ये मैसेज 23 मार्च को भेजा गया था. जिसमें छात्रों से ईद-उल-फितर (ईद) से पहले स्कूल में सेलिब्रेशन के लिए एक ड्रेस कोड जिसमें कुर्ता पजामा और टोपी पहनने और खाने पीने का सामान लेकर आने के लिए कहा था. लेकिन इस मैसेज के सामने आने के बाद स्थानीय दक्षिणपंथी संगठन देवभूमि संघर्ष समिति ने स्कूल को चेतावनी दी कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे और कानूनी कदम उठाएंगे. जिसको देखते हुए स्कूल ने सर्कुलर जारी कर कार्यक्रम रद्द कर दिया.

स्कूल के तरफ से जारी संदेश 

फोटो: द क्विंट द्वारा प्राप्त 

स्कूल प्रशासन ने कहा, "हमारे बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है."

स्कूल प्रशासन ने मीडिया स्टेटमेंट जारी कर बताया,

"हमें यह जानकारी मिली है कि कुछ व्यक्तियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हमारे संस्थान के बारे में झूठे, भ्रामक और सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ संदेश पोस्ट किए हैं. ऑकलैंड हाउस स्कूल हमेशा से होली, ईद, दिवाली, गुरुपुरब और क्रिसमस जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहारों को मनाता रहा है—यह किसी धार्मिक अनिवार्यता के रूप में नहीं, बल्कि भारत की बहुलतावादी भावना को सम्मान देने के रूप में किया जाता है. हमारा उद्देश्य सभी पृष्ठभूमियों के बच्चों के बीच सहानुभूति, समझ और सम्मान को बढ़ावा देना है. इन आयोजनों में भाग लेना हमेशा स्वैच्छिक होता है, और इनमें किसी भी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान या निर्देश शामिल नहीं होता.

स्टेटमेंट में आगे लिखा है, "हम इन उत्सवों को धार्मिक प्रचार के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हैं. ऐसे काम केवल सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाते हैं और जनता को भ्रमित करते हैं."

स्कूल की तरफ से कार्यक्रम को रद्द करने के बारे में कहा गया कि हाल की गलतफहमियों और संभावित अशांति की आशंका को देखते हुए, स्कूल ने शांति और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए इस कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया है. साथ ही छात्रों को हमेशा की तरह नियमित स्कूल यूनिफॉर्म में स्कूल आने के लिए कहा गया है.

देवभूमि संघर्ष समिति के इतिहास से पहले जानते हैं विरोध का क्या है कारण

क्विंट ने स्कूल के कार्यक्रम को रद्द करने की चेतावनी देने वाले संगठन देवभूमि संघर्ष समिति से संपर्क किया तो हमारी बात इसके संयोजक भरत भूषण से हुई. भरत भूषण ने कहा, "स्कूल का एक अलग एजेंडा चल रहा है. यहां होली-दिवाली नहीं मनाई जाती, सिर्फ क्रिसमस मनाया जाता है और अब ईद मनाने की कोशिश की जा रही है. क्या हम अपने बच्चों को स्कूल में मुल्ला-मौलवी बनने के लिए भेजते हैं." भूषण आगे कहते हैं,

"ऑकलैंड हाउस स्कूल हिमाचल का बहुत फेमस स्कूल है. 1960 के आसपास ईसाई सिद्धांतों को लेकर इस स्कूल की स्थापना की गई थी, लेकिन यहां मुल्ले तैयार हो रहे हैं. हमारे बच्चों को स्कूल में टीका भी नहीं लगाने दिया जाता, लेकिन ईद के लिए ड्रेस कोड जारी किया जा रहा है कि कुर्ता-पजामा और टोपी पहनकर आना है. ये लोग हिमाचल प्रदेश के स्कूलों के अंदर एक अलग एजेंडा लागू करना चाहते हैं, जिसके जरिए प्रदेश में इस्लाम को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है."

भरत भूषण के आरोपों पर स्कूल का जवाब

भरत भूषण के दावों को चेक करने के लिए हमने ऑकलैंड हाउज स्कूल फॉर बॉयज के प्रिंसिपल रूबेन से बात की. भरत भूषण के आरोपों पर जवाब देते हुए प्रिंसिपल ने कहा,

"हमारे यहां गर्ल्स स्कूल और बॉयज स्कूल हैं. गर्ल्स स्कूल 1866 से है. फिर 2008 में बॉयज स्कूल भी बना. गर्ल्स स्कूल में अलग-अलग फेस्टिवल पर स्कूल में इवेंट और सेलिब्रेशन होता रहा है. अगर बॉयज स्कूल की बात करें तो पहले हम ये सारे त्योहार नहीं मनाते थे, लेकिन इस बार से शुरू किया है. हमने होली भी मनाई थी, ईद मानने वाले थे. अब हम आगे रामनवमी भी मनाते."

द क्विंट से बात करते हुए ऑकलैंड हाउज स्कूल फॉर बॉयज के प्रिंसिपल रूबेन कहते हैं, "यह सिर्फ नर्सरी से कक्षा 2 तक के बच्चों के लिए था. क्योंकि हम सभी करके ही सीखते हैं. सभी धर्मों और इंसान के प्रति सम्मान रखना चाहिए. त्यौहारों को साथ में मनाना- हर इंसान को यही सिखाया जाता है. यही वजह है कि हम ऐसा करना चाहते थे. लेकिन हमें किसी विवाद में नहीं उलझना है और छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर हमने ईवेंट को वापस ले लिया. हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है."

जब हमने ऑकलैंड स्कूल का फेसबुक पेज खंगाला तो हमें वहां 13 मार्च का एक पोस्ट मिला. जिसमें स्कूल में होली सेलिब्रेशन का जिक्र है, साथ ही बच्चों की फोटो भी है जिसमें उनके हाथों पर रंग लगे हैं. बच्चो के हाथ में खाने के सामान भी हैं.

ऑकलैंड स्कूल में होली सेलिब्रेशन

(फोटो- फेसबुक पेज ऑकलैंड स्कूल)

वहीं क्विंट को सोशल मीडिया पर बीते होली की वीडियो भी दिखी जिसमें ऑकलैंड गर्ल स्कूल में कुछ छात्राएं और शिक्षिका एक दूसरे को रंग/अबीर लगाते दिख रही हैं.

इसके अलावा जहां तक ईद मिलन पर बच्चों से खाने और कुर्ता पजामा जैसे कपड़े पहनकर आने से जुड़े नोटिस को लेकर मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई है वहीं इस बीच क्विंट को होली सेलिब्रेशन से जुड़ा एक नोटिस भी मिला है. स्कूल की तरफ से होली में जारी एक नोटिस में बच्चों से होली सेलिब्रेशन को देखते हुए रंग बिरंगे कपड़े पहनकर आने के लिए कहा गया है. साथ ही पूरी, सब्जी और गुजिया या होली से जुड़े कोई भी पकवान लेकर आने के लिए कहा गया है ताकि सब शेयर कर सकें. इसके अलावा पेंटिंग के लिए कलर भी लाने की बात कही गई है.

होली सेलिब्रेशन के लिए नोटिस

(फोटो- क्विंट हिंदी)

मतलब साफ है कि सिर्फ ईद में ही कपड़े और खाने को लेकर मैसेज नहीं भेजा था स्कूल ने, बल्कि होली पर भी खाने और पहनने को लेकर मैसेज भेजा गया था.

शिमला की संजौली मस्जिद विवाद और ईद सेलिब्रेशन रोकने वाला एक ही संगठन

हिमाचल प्रदेश में पिछले साल इसी संगठन ने संजौली मस्जिद विवाद के खिलाफ प्रदेश भर में प्रदर्शन किया था. उस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस कर्मियों से झड़प भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद की ओर मार्च करते हुए, 'हिमाचल ने ठाना है, देवभूमि को बचाना है' और 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए थे.

शिमला में 11 सितंबर 2024 को हिंदूवादी संगठन के लोगों ने संजौली मस्जिद को अवैध बताते हुए गिराने के लिए प्रदर्शन किया. भरत भूषण या कहें देवभूमि संघर्ष समिति वही संगठन है जिसने संजौली मस्जिद के खिलाफ मोर्चा खोला था.

तब हिंदू जागरण मंच ने दावा किया कि मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया है और “बाहरी लोगों” को वहां शरण दी जा रही है. हालांकि मस्जिद में बने तीसरे और चौथे फ्लोर को लेकर मामला कोर्ट में था, न कि पूरी मस्जिद पर विवाद था.

इसके अलावा देवभूमि संघर्ष समिति ने राज्य में रह रहे बाहरी मुसलमानों के खिलाफ एक सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार आंदोलन भी चलाया था.

देवभूमि संघर्ष समिति क्या है?

पहली बार नहीं है जब देवभूमि संघर्ष समिति मुसलमानों का विरोध कर रही है. दरअसल देवभूमि संघर्ष समिति का निर्माण ही विवादित मुद्दों की वजह से हुआ है.

16 सितंबर 2024 को प्रकाशित एक न्यूज आर्टिकल के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विवादास्पद संजौली मस्जिद और इसी तरह के अन्य मामलों पर आवाज उठाने के लिए हिमाचल प्रदेश में अपनी "देवभूमि संघर्ष समिति" का गठन किया है. VHP के अनुसार, यह देवभूमि (देवताओं की भूमि) की पवित्रता को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के उनके व्यापक प्रयास का हिस्सा है कि ऐसे विवादास्पद ढांचों से कानूनी व संवैधानिक तरीकों से निपटा जाए.

देवभूमि संघर्ष समिति

फोटो: FB/देवभूमि संघर्ष समिति

देवभूमि संघर्ष समिति के तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, समिति के हिमाचल प्रदेश इकाई की मार्गदर्शक मण्डल में स्वामी योगानन्द जी महाराज, स्वामी दयानंद भारती, स्वामी तन्महिमानन्द जी महाराज, स्वामी धीरानंद जी महाराज, साध्वी गार्गी भारती शामिल हैं. समिति के संरक्षक ब्रिगेडियर एल.सी जसवाल (रिटायर्ड), कर्नल दौलत सिंह (रिटायर्ड) एवं संयोजक अधिवक्ता भारत भूषण और सह संयोजक विजय शर्मा व मदन ठाकुर हैं.

इसके अलावा विजयेन्द्र पाल सिंह को सचिव, ईं. बी.एम. जोशी को सह सचिव और टी. एन. शर्मा को कोषाध्यक्ष बनाए गया.

हालांकि, देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक भरत भूषण VHP से जुड़ाव की बात से इनकार करते हैं. वे कहते हैं,

"देवभूमि संघर्ष समिति का किसी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है. संजौली मस्जिद विवाद के दौरान समाज के लोगों ने इसकी शुरुआत की थी. देवभूमि संघर्ष समिति 'वॉयस ऑफ पीपल' है और इसका कोई लीडर नहीं है.

संजौली मस्जिद विवाद के बाद सिरमौर में वक्फ बोर्ड के विरोध में प्रदर्शन करते वभूमि संघर्ष समिति के लोग 

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भारत भूषण पेशे से वकील हैं. उन्होंने द क्विंट को बताया कि वे हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत करते हैं.

संजौली मस्जिद विवाद के बाद देवभूमि संघर्ष समिति ने संजौली बाजार में बाहरी राज्यों से आए मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार शुरू किया था. और अक्टूबर के महीनों में शिमला की दुकानों पर 'सनातन सब्जी वाला' के पोस्टर लगाए. इसके अलावा बाहरी लोगों से किसी भी तरह का व्यापार ना करने की अपील की थी.

दुकानों पर 'सनातन सब्जी वाला' पोस्टर लगवाते देवभूमि संघर्ष समिति के सह संयोजक विजय शर्मा

फोटो: सोशल मीडिया 

समिति के संयोजक भरत भूषण ने 16 मार्च को फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संजौली मस्जिद से कथित अवैध निर्माण जल्द हटाने की मांग दोहराई है. भरत भूषण ने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते अवैध निर्माण नहीं हटाता तो 'संजौली चलो' आंदोलन की शुरुआत की जाएगी.

इस मामले पर पुलिस कहां है?

इस पूरे विवाद को लेकर हमने स्थानीय थाना से बात की. लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी के मुंशी संतराम ने बताया,

"यहां कोई हंगामा या विवाद नहीं हुआ है. दरअसल स्कूल ने बच्चों के लिए कोई इंटर्नल मैसेज दिया था. जिसपर कुछ लोगों ने कमेंट दिया. जिसके बाद स्कूल ने अपने ही स्तर पर मामले को सुलझा लिया. हमारे पास कोई एप्लीकेशन नहीं आया."

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

विवाद को लेकर हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए बयान में कहा, "केवल सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है. मामले की जांच की जाएगी. हालांकि, स्कूल प्रशासन की ओर से यह संदेश केवल सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के इरादे से जारी किया गया था."

रोहित ठाकुर ने आगे कहा, "समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो बेवजह मतभेद पैदा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों को खत्म किया जाना चाहिए. मैंने पूरे मामले की जानकारी इसलिए जुटाई है, क्योंकि आज के सोशल मीडिया के दौर में ऐसे मामले बढ़ने में देर नहीं लगती. हम सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने के पक्षधर हैं. हमारा सामाजिक ताना-बाना बरकरार रहना चाहिए, सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए."

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Published: 30 Mar 2025,06:08 PM IST

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