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Loksabha Election: चुनाव लड़ने के लिए एक उम्मीदवार को कितने पैसे चाहिए, खर्च की लिमिट क्या है?

2019 में एक कैंडिडेट लोकसभा चुनाव में 70 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव में 28 लाख रुपये तक खर्च कर सकता था.

क्विंट हिंदी
राजनीति
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Loksabha Election: चुनाव लड़ने के लिए एक उम्मीदवार को कितने पैसे चाहिए, खर्च की लिमिट क्या है?

(फोटो: क्विंट हिंदी)

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देश की वित्त मंत्री और सत्तारूढ़ दल बीजेपी की नेता निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि उनके पास "लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक धन नहीं था" इसलिए उन्होंने आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु के किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

सीतारमण के इस बयान के बाद आपके मन में ये सवाल आएगा कि आखिर चुनाव लड़ने के लिए किसी कैंडिडेट को कितने पैसे चाहिए होते हैं? चुनाव आयोग के क्या नियम हैं? एक कैंडिडेट कितने पैसे खर्च कर सकता है? साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास कितनी चल-अचल संपत्ति है जो उन्होंने पैसे की कमी की बात कही है?

सीतारमण ने क्या कहा?

निर्मला सीतारमण ने एक मीडिया नेटवर्क के कॉन्क्लेव के दौरान चुनाव नहीं लड़ने की बात कही है. उन्होंने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में "जीतने की क्षमता" के बारे में भी चिंता व्यक्त की, यह संकेत देते हुए कि चुनाव का निर्णय जातीय और धर्म के आधार पर तय किया जाता है.

"मुझे यह भी समस्या है कि आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु. जीतने लायक अलग-अलग मानदंडों का भी सवाल है. आप इस समुदाय से हैं या आप उस धर्म से हैं? मैंने नहीं कहा, मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसा करने में सक्षम हूं.'."
निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री
उन्होंने आगे कहा, "मेरा देश, मेरी कमाई और मेरी बचत मेरी है, भारत की संचित निधि (राजस्व भंडार) नहीं है."

दरअसल, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने फरवरी में संकेत दिया था कि बीजेपी कर्नाटक से निर्मला और विदेश मंत्री एस जयशंकर को मैदान में उतार सकती है. 2022 में निर्मला बेंगलुरु से राज्यसभा सांसद चुनी गईं, जबकि एस जयशंकर गुजरात से चुने गए हैं.

चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशियों को कितने पैसे चाहिए होते हैं?

दरअसल, चुनाव में कितने पैसे खर्च होते हैं, इसका कोई डेटा नहीं है लेकिन चुनाव आयोग ने पैसा खर्च करने की सीमा बनाई है.

चुनाव आयोग के क्या नियम हैं?

चुनावी प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग की जिम्मेदारी होती है कि वो राजनीतिक पार्टियां और और उम्मीदवारों के चुनावी खर्चे को नजर रखें. चुनाव आयोग के ऑबजर्वर और राज्य व केंद्रीय एजेंसियों चुनाव में किए जा रहे खर्चे को मॉनिटर करते हैं.

चुनाव में पार्टियां कितना खर्च कर सकती हैं इसकी कोई लीमिट तो नहीं बताई गई है, लेकिन एक उम्मीदवार लोकसभा चुनाव में अपने क्षेत्र में 95 लाख रुपये और विधानसभा सीटों के लिए 40 लाख रुपये खर्च कर सकता है. कुछ छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, लोकसभा के लिए लिमिट 75 लाख रुपये और विधानसभाओं के लिए 28 लाख रुपये हैं.

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इस लिमिट में प्रचार, रैलियां, पोस्टर और बैनर और वाहन शामिल हैं. चुनाव के बाद उम्मीदवारों को 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का ब्यौरा देना होगा.

महंगाई दर के हिसाब से हर वर्ष वस्तुओं और संपत्तियों की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जाता है. जिसे देखते हुए चुनाव आयोग समय-समय पर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्चे की सीमा बढ़ाता रहता है.

साल 2019 में एक कैंडिडेट लोकसभा चुनाव में 70 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव में 28 लाख रुपये तक खर्च कर सकता था.

चुनाव आयोग अक्सर खर्च सीमा को संशोधित करता है, जो मुख्य रूप से कॉस्ट फैक्टर और वोटर की बढ़ती संख्या पर आधारित होती है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, साल 2022 में, पिछली बार जब सीमा को संशोधित किया गया था, तो चुनाव आयोग ने एक समिति बनाई थी और राजनीतिक दलों, मुख्य चुनाव अधिकारियों और चुनाव ऑबजर्वर से सुझाव मांगे थे, और पाया कि 2014 के मुकाबले  मतदाताओं की संख्या और लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (cost inflation index) में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई है. लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीएफआई) का इस्तेमाल इनफ्लेशन की वजह से  साल-दर-साल गूड्स और ऐसेट की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है. सीएफआई 2014-15 में '240' से बढ़कर 2021-22 में '317' हो गया था.

पहले लोकसभा चुनाव में खर्च की लिमिट कितनी थी?

साल 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में एक कैंडिडेट को 25,000 रुपए खर्च करने की इजाजत थी, वहीं उत्तर पूर्वी राज्यों में यह लिमिट 10,000 रुपए थी. इसके बाद 1971 में ज्यादातर राज्यों के लिए यह लिमिट बढ़ाकर 35000 कर दी गई.

साल 1980 में खर्च की लिमिट बढ़ाई गई और कैंडिडेट को चुनाव में एक लाख रुपये तक खर्च करने की इजाजत मिल गई.

चार साल बाद 1984 में कुछ राज्यों में यह लिमिट बढ़ाकर 1.5 लाख कर दी गई है. हालांकि छोटे राज्यों में लिमिट 1.3 लाख रुपए थी.

कब-कब बढ़ाई गई चुनावी खर्चे की लिमिट

  • अगला बड़ा बदलाव 1996 में आया, उदारीकरण के बाद का चुनाव में ज्यादातर राज्यों के लिए लिमिट को तीन गुना बढ़ाकर 4.5 लाख रुपये कर दिया गया.

  • 1998 के चुनाव में यह सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया गया.

  • 2004 में चुनावी खर्चे की लिमिट बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई.

  • चुनाव खर्चे की लिमिट में अगला बड़ा बदलाव 2014 में किया गया और इसे 25 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गई.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास कितनी संपत्ति है?

सीतारमण ने कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा है. वह 2016 से राज्यसभा सदस्य हैं. 2022 में राज्यसभा सांसद के तौर पर निर्मला सीतारमण द्वारा दाखिल घोषणा के मुताबिक उनके पास 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है.

केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज सीतारमण के शपथपत्र के अनुसार, उनके पास लगभग 1.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 69.12 लाख रुपये की चल संपत्ति है, जो कुल मिलाकर 2.56 करोड़ रुपये है.

निर्मला सीतारमण के पास 1.7 करोड़ रुपये की आवासीय इमारत में 50% हिस्सेदारी है, जिसका स्वामित्व उनके और उनके पति के पास है. उनके पास 17 लाख रुपये की गैर-कृषि भूमि भी है. चल संपत्तियों में निर्मला के पास 35.52 लाख रुपये की बैंक में जमा और 18.39 लाख रुपये के आभूषण हैं.

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Published: 29 Mar 2024,04:18 PM IST

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