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पाकिस्तानी अपनी ही सेना को कारगिल और बांग्लादेश में हार की याद क्यों दिला रहे?

कठपुतली नेताओं से थक चुका है पाकिस्तान

गुल बुखारी
नजरिया
Published:
<div class="paragraphs"><p>पाकिस्तानी अपनी ही सेना को कारगिल और बांग्लादेश में हार की याद क्यों दिला रहे?</p></div>
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पाकिस्तानी अपनी ही सेना को कारगिल और बांग्लादेश में हार की याद क्यों दिला रहे?

(फोटो: क्विंट हिंदी)

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रविवार को पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल, जिन्हें पाकिस्तानी भाषा में यूथिया कहा जा सकता है, ने यह तय किया कि उन्हें ट्विटर पर नवाज शरीफ और उनके खानदान पर छींटाकशी करनी है. इस नेक काम में उन्होंने जरदारी फैमिली का भी जिक्र कर दिया. यूथिया पाकिस्तान में किसी ऐसे शख्स को कहा जाता है, जो नादान और जल्दबाज होता है. हां, ट्विटर पर एक और जनरल काफी बवाल मचाए रहते हैं. पाकिस्तान और भारत में उन्हें गफूरा के नाम से जाना जाता है. लेकिन यह गफूरा नहीं, दूसरे महाशय हैं. इनका नाम है, मेजर जनरल (रिटायर्ड) जावेद असलम ताहिर. ट्विटर पर इनके महज आठ हजार फॉलोअर्स हैं- पर उनके नए बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा:

“एमएनएस (मोहम्मद नवाज शरीफ) और उनका खानदान लुटेरों और गद्दारों का झुंड है. उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए जोकि एक मिसाल बने. पाकिस्तान की गरीब अवाम को लूट का माल लौटाया जाना चाहिए. एएज़ेड (आसिफ अली जरदारी) और उनके खानदान पर भी यही बात लागू होती है. अवाम चंद सिक्कों के लिए अपना ईमान न बेचे. आगे वाली नस्लों को बचाने के लिए उन्हें वोट न दें.”

लोग बेइंतहा नाराज हैं

उन्हें इस बात से जरूर सदमा लगा होगा कि वह दिन हवा हुए, जब रिटायर्ड या मौजूदा जरनल बेरोक-टोक ऐसी बात कहा करते थे, और उन्हें लोगों के जवाबों से रूबरू नहीं होना पड़ता था. क्योंकि यहां सिर्फ जवाब नहीं दिए गए, जवाबी हमले ही किए गए. इस मामले में लोगों को बहुत कुछ मालूम है. इसीलिए उन्होंने वैसे ही जवाब दिए, जैसे जवाब इस किस्म के शख्स को दिए जाने चाहिए. हर जवाब से लोगों का गुस्सा जाहिर होता था, और ऐसी सैकड़ों प्रतिक्रियाएं थीं. मैंने हरेक को पढ़ा और हरेक से मुतासिर हुई. ऐसा लगा, जैसे गुस्से का बांध टूट गया है. मुझे यकीन है कि जवाब देने वाले ज्यादातर लोग इस शख्स को नहीं जानते. लेकिन वे लोग इन अफसरों से बहुत बेजार हैं, उनके लिए नफरत से भरे हुए हैं जिन्होंने शुरुआत से पाकिस्तान को जैसे अपनी मुट्ठी में कैद किया हुआ है और लगातार अवाम और उनके नुमाइंदों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं

मेजर साहब का ट्वीट बिल्कुल गलत फैसला था. जिस दौर में सेना के करप्शन से सब वाकिफ हों, और कई मामलों में, उनकी असलियत साबित हो चुकी हो, इस बंदे ने ऐसा राग अलापना शुरू कर दिया, जिसे लोग भुला चुके हैं.

पाकिस्तान में शरीफ खानदान और पाकिस्तान मुसलिम लीग (एन) के साथ बहुत कुछ हुआ. अवाम ने यह सब देखा. उसने यह भी देखा कि जजों और जनरलों के गठजोड़ ने देश से अवाम के नुमाइंदों को निकाल बाहर फेंका और फिर देश पर हाइब्रिड शासन थोपा. इसके बाद करप्शन की कहानी के बहकावे में शायद ही कोई आए.

यह वह वक्त है, जब लोग देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने, रुपये की कीमतों के गिरने, बेरोजगारी और गरीबी बढ़ने, ईंधन और बिजली के दाम बढ़ने के लिए सेना को मुजरिम ठहरा रहे हैं. ऐसे में यह शख्स नवाज़ शरीफ़ और उनके खानदान को "लुटेरा और गद्दार" कहने की हिम्मत दिखा रहा है.

गद्दार कौन समझा जाता है

यह पाकिस्तान के इतिहास में वह दौर है जब उसकी अवाम सेना को गद्दार के तौर पर देख रही है. ताहिर को किसी ने याद दिलाया कि जनरल मुशर्रफ ने किस तरह पाकिस्तानियों को कुछ लाख डॉलर में अमरिकियों को बेच दिया था, किसी ने उन्हें कच्छ के रण की याद दिलाई, किसी ने सुध दिलाई कि किस तरह जनरल अय्यूब ने भारत को पाकिस्तान की कई नदियां बेच दी थीं, कारगिल की लड़ाई, और बहुत सी लड़ाइयां, पूर्वी पाकिस्तान हम हार चुके हैं. जावेद मकसूद बेग नाम के बंदे ने लिखा कि, “कानूनी कार्रवाई के जरिए सिर्फ एक गद्दार साबित हुआ है, वह है परवेज मुशर्रफ. इसलिए अब चुप रहो और बैठ जाओ, जोकर कहीं के.”

एस सलीम नाम के एक यूजर ने लिखा, “असल गद्दार तो ये जनरल्स खुद हैं. मेहरबानी करके, ये लीक वीडियो देखें, जिसमें मुशर्रफ अमेरिकी सीनेटरों से इल्तजा कर रहे हैं कि खूफिया ऑपरेशंस के जरिए उन्हें दोबारा सत्ता में लाएं- यह गद्दारी है.” इसके बाद लीक किया हुआ वीडियो अटैच कर दिया गया.

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इमरान शाहीन का जवाब तो वायरल हो गया क्योंकि इसमें बहुत से लोगों के जज्बात बयान होते थे: "जनरल साहब, दुरस्त फरमाया, नवाज शरीफ की फैमिली ने हिंदुस्तान को तीन दरिया बेचे, नवाज शरीफ की फैमिली ने जनरल अरोड़ा के सामने 93 हजार फौजियों से हथियार डलवाए, सियाचिन, कारगिल सरेंडर किया, पाकिस्तानियों को बेच कर 18 अरब डॉलर कमाए, मुल्क को लूट कर पापा जॉन्स पिज्जा और 99 कंपनियां बनाई, लंदन में भारत से फ्लैट लिया."

तो, साफ था कि लोग किसे गद्दार समझते हैं

और यह भी कि लोग अब अपने नुमाइंदों की बदनामी को बर्दाश्त नहीं करेंगे. मुझे यकीन है कि अगर जनरलों ने नेताओं पर हमला करने और उन पर बेबुनियादी इल्जाम लगाने की कोशिश की तो आम लोग उनसे बुरा बर्ताव करने से चूकेंगे नहीं.

ऐसे जनरल किस दुनिया में रहते हैं, मेरी समझ के बाहर है. क्योंकि अवाम अब इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि अदालतों और सेना ने पूरी एड़ी चोटी का जोर लगा लिया लेकिन नवाज शरीफ या उनके मंत्रियों के करप्शन का कोई सबूत नहीं ढूंढ पाए. और यह शख्स अब भी यह सोचता है कि ऐसी बातें करके, बच निकलेगा.

जनरल्स को उस नए पाकिस्तान को आंखें खोलकर देखना होगा

लगता है, जनरल साहब को अब नया पाकिस्तान नजर आने लगा होगा. ट्विटर यूजर्स ने कई गड़े मुर्दे उखाड़कर रख दिए. जैसे जनरल परवेज कयानी और जनरल मुशर्रफ का स्विस बैंक एकाउंट, जनरल जिआ उल हक और जनरल फजल हक के बेटों का बिजनेस एंपायर, जनरल असीम सलीम बाजवा के खानदान की पापा जोन्स की फ्रेंचाइजी और अनगिनत बिजनेस. कइयों ने तो उनसे अपने एसेट्स का खुलासा करने की भी अर्जी लगाई.

इस बात पर मुझे उर्दू की एक कहावत याद आती है, “जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर का रुख कर लेता है.” मजे की बात यह है कि एक ट्विटर यूजर ने अपने कमेंट में इस कहावत का भी हवाला दिया है.

कई लोगों ने इस शख्स को कोट-ट्वीट किया और सबसे कहा कि सभी जवाबों को पढ़ा जाए. अबरार असलम ने लिखा, “इस जरनैल ने नए अवाम को ईमान न बेचने का ही तो कहा है, लोग इतना गुस्सा क्यों कर रहे हैं? वजह?

लोगों ने महसूस किया कि कैसे सभी ने जनरल ताहिर पर जवाबों के तीर चलाए हैं. एक सलमान फारुखी ने तो चुटकी ली, “पाकिस्तानी बहासियात कौम पाक फौज का कितना एहतराम करती है, किस तरह खिरज-ए-तहसीन पेश करती है, इस ट्वीट के कमेंट्स को जरूर पढ़ें. नोट: ख्वातीन और 18 साल से कम उम्र अफराद इस सब से दूर रहें.” एक ने “exemplary” की स्पेलिंग की तरफ इशारा किया. तारिक नाम के एक शख्स ने तीर एकदम निशाने पर मारा, “इंटरनेट की ईजाद से कब्ल जरनैल नामी मखलूक बहुत आगे आला फ़ेहम, ज़हीन, फ़र्ज़ शनास, दियानत दार समझे जाते थे. खुदा की करनी के फिर इंटरनेट ईजाद हो गया.

और कुछ हो या न हो, इस प्रकरण से उन जनरलों की आंखें जरूर खुल गई होंगी, जो अपनी दुनिया में ही मस्त रहते हैं. वे पाकिस्तान की बदलती सच्चाई, लोगों के राजनैतिक पक्केपन और समाज में अपनी हैसियत जरूर समझ गए होंगे. इसके अलावा उन राजनेताओं को भी सबक मिल गया होगा जो लगातार सोचते हैं कि जनरलों की मदद से ही सत्ता हासिल की जा सकती है. हाल के उपचुनावों से भी साफ था कि लोग उन नेताओं की किनारे लगाने को आमादा हैं जो जनरलों के हाथों की कठपुतली, उनके साथ साजिश करने वाले समझे जाते हैं.

(गुल बुखारी पाकिस्तानी पत्रकार और राइट्स एक्टिविस्ट हैं. उनका ट्विटर हैंडिल @GulBukhari. है. यह एक ओपनियन पीस है. यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं. क्विंट का उनसे सहमत होना जरूरी नहीं है.)

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