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लगता है स्मृति ईरानी को महिषासुर से कोई दिक्कत है. लेकिन मुख्यधारा में आने वाले बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा के हिंदू ब्राह्मण भी महिषासुर की पूजा करते हैं. बचपन में दुर्गापूजा के समय मुझे याद है कि मुझे भी महिषासुर को प्रणाम करने को कहा जाता था, उसकी मूर्ति पर फूल चढ़ाने को कहा जाता था.
क्योंकि महिषासुर ब्रह्मा का एक महान भक्त था (इसलिए पूरी तरह हिंदू था) - एक आधा-देवता, जिसे किसी और ने नहीं, खुद ब्रह्मा ने शक्तियां दी थीं. उसे सुंदर और शक्तिशाली दर्शाया गया है. रावण जैसे कई गुण होते हुए भी उसका रावण जैसा पुतला नहीं बनाया जाता. साथ ही उसे दुर्गा के बराबर में जगह दी जाती है, ना कि रावण की तरह जलाया जाता.
हिंदुत्व की शुरुआत में कई देवताओं को असुर कहा जाता था. अच्छे और बुरे असुर बहुत बाद में आए. इसी तरह कई देवता भी ऐसे थे जो बहुत अच्छे नहीं थे. महाबली (महाबलीपुरम, द्रविड़िस्तान का) एक अच्छा असुर था. उसने देवताओं पर भी अपना प्रभुत्व जमा लिया था. उसके जैसे कई असुर और भी थे. इसीलिए उन्हें भी हिंदुओं के प्रमुख देवों, ब्रह्मा-विष्णु-महेश ने ईश्वरीय शक्तियां दी थीं. पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत के वे गहरे रंग के देवता भी अच्छे असुर ही रहे होंगे, जिन्हें हिंदूओं ने बाद में अपना लिया था. उनकी पूजा आज भी नीची जातियों में होती है.
कुछ लोग देवों और असुरों की लड़ाई को शुरूआती फारसी प्रवासियों और भारतीयों की लड़ाई की तरह भी देखते हैं. पारसी धर्म में अहूर को भगवान माना गया है, जबकि दैव बुरे देवता थे. भारत में यह एकदम उलटा है. तो पहले से भारत में रह रहे फारसियों के लिए उनके देश से उस समय आने वाले अहूर दुश्मन बन गए, असुर बन गए. जिन्हैं पहले फारस में दैव कहा जाता होगा वे भारत आकर देव यानी अच्छे देवता हो गए.
स्मृति ईरानी ने संसद में एक पर्चा पढ़ा जिस में देवी दुर्गा को सेक्स वर्कर बताया गया था. पर हमने अभी तक वैसा पर्चा कहीं नहीं देखा. बात यह है कि जिस करह महाबली को हराने के लिए वामन (विष्णु) ने जिस तरह धोखा दिया था, उसी तरह कई जनजातियां यह मानती हैं कि महिषासुर की हत्या भी इंद्र की भेजी गई दुर्गा नाम की एक नर्तकी ने धोखे से की.
और इसी तरह दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली पुन्या माटी (पवित्र मिट्टी) में वेश्यालय से लाई मिट्टी मिलाने की परंपरा है, और इस परंपरा के बारे में कोई तर्क मौजूद नहीं है. हो सकता है कि दक्षिण पंथियों ने सेक्स वर्कर वाली कहानी गढ़ने के लिए इसी परंपरा का सहारा लिया हो.
दानव, असुर, राक्षस आदि सिर्फ लोगों पर थोपो गए शब्द थे. वे असल में ‘राक्षस’ नहीं थे. बिलकुल उसी तरह जैसे ‘पाकिस्तानी’ एक विशेषण है. और जिन्हें पाकिस्तानी कहा जाता है, वे भी ‘राक्षस’ नहीं हैं. मैलोड्रामा से भरे हुए भाषण हमें किसी दिशा में नहीं ले जाएंगे. हमें थोड़ी दृढ़ता और संवेदना की जरूरत है.
Published: 29 Feb 2016,10:50 PM IST