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ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता में बैठे यादवों के बीच कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. अखिलेश यादव ने मंगलवार को यूपी के मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया है. सब जानते हैं कि सिंघल, अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव के करीबी हैं.
पहले ही यादव परिवार में सब ठीक नहीं चल रहा था और दीपक सिंघल को हटाए जाने के बाद एक बार फिर कलह देखने को मिल सकती है. सिंघल, शिवपाल यादव की टीम के सबसे विश्वसनीय पात्रों में से एक थे. वो मुख्य सचिव (सिंचाई) के पद पर भी रहे चुके हैं. कृषि विभाग उस समय शिवपाल यादव के पास था. इसके बाद कुछ समय के लिए सिंघल को गृह विभाग में भेजा गया था लेकिन शिवपाल ने उन्हें वापस बुला लिया था.
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, दीपक सिंघल को मुख्य सचिव नहीं बनाना चाहते थे लेकिन अपने पिता और पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह के कहने पर उनको ऐसा करना पड़ा. मुलायम सिंह ने गुस्साए शिवपाल को मनाने के लिए ऐसा किया था.
परिवार की कलह तब सामने आई जब समाजवादी पार्टी में बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को शामिल करने की बात की गई. इसके पीछे शिवपाल यादव का ही दिमाग था. लेकिन अखिलेश ने दो बार सोचे बिना इस फैसले को नकार दिया और विलय में अहम भूमिका निभाने वाले बलराम यादव की मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी थी.
इसके चलते शिवपाल कोपभवन चले गए जिसके बाद मुलायम सिंह यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा. साथ ही विलय को भी बीच में रोक दिया. इसके बाद बलराम सिंह यादव को फिर से कैबिनेट में लिया गया. घटना के बाद से ही चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश यादव के बीच कोल्ड वार छिड़ गई. एक तरफ जहां पार्टी में वापसी करने वाले अमर सिंह शिवपाल के साथ खुलकर खड़े दिखे वहीं अखिलेश के दूसरे चाचा राम गोपाल यादव मुख्यमंत्री के साथ खुलकर खड़े रहे.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने केवल मुलायम सिंह यादव के दवाब की वजह से दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाया था. लेकिन दीपक सिंघल के अमर सिंह की पार्टी में जाने के चलते अखिलेश नाराज हो गए. इसके बाद अखिलेश ने दीपक सिंघल को चलता कर दिया. पार्टी के अल्पसंख्यकों के नेता आजम खान वैसे ही अमर सिंह की पार्टी में एंट्री और राज्यसभा में भेजे जाने के चलते जले-भुने बैठे हैं.
समाजवादी पार्टी इस समय पूरी तरह बंटी हुई दिखाई दे रही है. कुछ महीनों में चुनावों में उतरने वाली समाजवादी पार्टी में एक्शन और रिएक्शन एक फैशन बन गया है. लोगों की नजरों के सामने चलने वाली इस लड़ाई का खामियाजा सपा को आने वाले चुनावों में भुगतना होगा, इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता.
Published: 13 Sep 2016,08:57 PM IST