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6 बातें जिनसे आईपीएल ने दर्शकों को नाउम्मीद किया

गेंदबाजी और बल्लेबाजी में जैसे ही थोड़ी ज्यादा उम्मीद की जाती है तो आईपीएल निराश करने लगता है.

अमृत माथुर
नजरिया
Updated:
(फोटो: BCCI)
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(फोटो: BCCI)
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जिस तरह शनिवार रात सुपर ओवर के दौरान उत्तेजना बढ़चढ़कर बोल रही थी आईपीएल ने ऐसे ही शानदार प्रदर्शन और जादुई क्षणों के जरिए आला दर्जे की क्रिकेट पैदा की है. इस सीजन में बल्लेबाजों जिस तरह ऊंचे छक्के जड़ते दिखते हैं, ऐसे में टीमों के लिए 200 का पीछा करना अब कठिन नहीं दिखता जैसे पहले हुआ करता था. लेकिन गेंदबाजी और बल्लेबाजी में जैसे ही थोड़ी ज्यादा उम्मीद की जाती है तो आईपीएल निराश करने लगता है. यहां हम कुछ ऐसे ट्रेंड्स की बात कर रहे हैं जब आईपीएल अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा.

भारतीय सुपरस्टारों की खराब फॉर्म

1. आईपीएल बल्लेबाजों के लिहाज से डिजाइन किया गया है. लेकिन कुछ भारतीय बल्लेबाज इस धूमधड़ाके में कहीं दिखाई नहीं दे रहें.

पिछले साल, विराट ने टूर्नामेंट में ऐसा जादू बिखेरा था जैसा कोई नहीं कर सका था. लेकिन इस सीजन में उनका प्रदर्शन ऐसा रहा है जैसे कोई सुपरस्टार मेहमान कलाकार की भूमिका निभा रहा हो. आरसीबी जिस तेज स्पीड डूब रहा है कोई ताज्जुब नहीं कि उसकी हालत लॉन्च होते ही जमीन पर आ गिरने वाले स्पेस रॉकेट जैसी हो सकती है.

(फोटो: IANS)

अकेले विराट ही नहीं है जिनका बल्ला ठंडा पड़ चुका है. रहाणे का बल्ले का कमाल देखने का अभी इंतजार ही हो रहा है. यहां तक कि महेंद्र सिंह धोनी जैसा जीनियस भी कभी कभी ही अच्छा प्रदर्शन कर पा रहा है.

युवराज की खराब फॉर्म भी दिल तोड़ने वाली है जबकि ये उनके जैसे क्लास और तजुर्बेकार खिलाड़ी के लिए बिल्कुल नई बात है. ऐसा ही कुछ रोहित शर्मा का है. वो भी प्रतिष्ठा के मुताबिक फॉर्म में आने को संघर्ष कर रहे हैं. ये सामूहिक पतन की वजह पता करना काफी कठिन है. क्या ये थकान है, क्योंकि ज्यादातर खिलाड़ी देश के भीतर चली लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीरीज के चलते सूटकेस लिए यहां से वहां घूम रहे हैं? या फिर उनमें आलस घर कर गया है क्योंकि सीनियर खिलाड़ियों को ना तो कॉन्ट्रैक्ट की चिंता है और ना ही उनका करियर ही दांव पर लगा है?

2. विदेशी सुपरस्टारों ने भी चमक खोई

(फोटो: AP)

ताज्जुब है कि एबी डीविलियर्स जैसा टॉप सुपरस्टार भी आईपीएल में कोई कमाल नहीं कर सका. ये 360 डिग्री मेगास्टार के फैन्स कभी कभार ही उसके बेहतरीन खेल की झलक देख सके हैं और ये अपनी चमक दिखाने में नाकाम रहा है. एबीडी को क्रिकेट के इस फॉरमेट का उस्ताद माना जाता है लेकिन फिलहाल उसकी बैटिंग में गिरावट समझ से बाहर की बात है. केवल एक वजह सामने है कि वो वो चोटिल होने की वजह से आईपीएल में खेलने को पूरी तरह तैयार नहीं थे. फैफ डु प्लेसी की कहानी तो और भी त्रासद है. इस दक्षिण अफ्रीकी कप्तान को बाहर बैंच पर बैठना पड़ा है.

3. भारतीय बॉलिंग हीरो की कमी

तमाम युवा भारतीय बल्लेबाज इन दिनों अपने खेल का लोहा मनवा रहे हैं लेकिन गेंदबाजी के मोर्चे पर अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है. अपनी बॉलिंग से दर्शकों में उत्तेजना भर दे ऐसे भारतीय “हीरो” गेंदबाज का इंतजार का लंबा खिंचता जा रहा है.

(फोटो: IANS)

हर एक आईपीएल टीम लेग-स्पिनर पर निर्भर करती है, लेकिन राशिद खान उस कमी को भरता है. युवा फास्ट बॉलर अपनी पॉवरफुर बॉलिंग से अपना अहम रोल निभा रहे हैं. अगर सबसे हॉट और उभरते किलाड़ी का अवॉर्ड दिया जाए तो बिला शक ये अवॉर्ड बासिल थंपी को दिया जा सकता है.

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4. खराब अंपायरिंग

इस आईपीएल सीजन को खराब अंपायरिंग के लिए जाना जाएगा. अंपायरों के फैसलों पर बार-बार सवाल उठे हैं. आईपीएल के जरिए दुनियाभर में भारतीय घरेलू क्रिकेट को शोकेस करने का मौका मिलता है लेकिन इस बार की अंपायरिंग भारतीय क्रिकेट के लिए बदनामी का सबब बन गई है. हमारे क्रिकेट को इस समस्य़ा पर जल्द गौर करना होगा.

5. निचले दर्जे की कैंचिंग

(फोटो: BCCI)

आईपीएल टैलेंट को पहचानकर तुरंत आगे लाने का काम करता है लेकिन इसमें तमाम गड़बड़ियां और गलतियां भी सामने आई हैं. सबसे ज्यादा चुभने वाली कमी अब तक सामने आई है वो है घटिया दर्जे की कैचिंग. यहां तक कि आसान कैच भी छोड़ दिए गए. ज्यादातर मौकों पर युवा भारतीय खिलाड़ी कैच छोड़ देते हैं या गलत फैसले ले लेते हैं. सबसे क्लासिक उदाहरण डीडी के अमित मिश्रा और संजू सैमसन का है जो रॉबिन उथप्पा और राबाडा को लपकने में नाकाम साबित हुए.

आश्चर्य की बात ये है कि केवल गैरअनुभवी खिलाड़ियों ने ही कैच नहीं छोड़े. विराट कोहली तक ने ऐसे कैच छोड़ दिए जो वो नींद में भी लपक सकते थे.

क्या कैच छोड़ने की ये बीमारी लाइट्स, एकाग्रता की कमी और भारी दवाब के हालात के चलते है?

6. इकतरफा मैच

20 ओवर के फॉरमैट में इससे ज्यादा बोरिंग या अरुचिकर कुछ नहीं हो सकता कि एक टीम दूसरी टीम के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दे. टी-20 क्रिकेट का मजा आखिरी गेंद तक आमने-सामने की लड़ाई के बाद होने वाली हार-जीत में ही आता है. सुपर ओवर में धड़कनें ना बढ़े तो इस फॉरमेट का कोई मजा नहीं है.

इसीलिए आरसीबी ने पूरी तरह दर्शकों को निराश किया. लंबे-छोड़े मार्जिन से खेल गंवा दिया. ना जोश था ना आखिरी तक लड़ने की भावना. वो तब जब टीम टैलेंट से लबालब भरी हो. केकेआर के खिलाफ अभी तक का सबसे खराब प्रदर्शन था – 10 ओवर से कम में ही पूरी टीम निपट गई.

(अमृत माथुर वरिष्ठ पत्रकार और बीसीसीआई के पूर्व जीएम है. भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर भी रह चुके हैं. उनसे @AmritMathur1 पर संपर्क किया जा सकता है)

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Published: 03 May 2017,12:51 PM IST

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