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महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और शेन वॉर्न इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल कराने के लिए की जा रही कोशिश का समर्थन कर रहे हैं.
इस मामले पर जब बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने सचिन का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा, ‘मेरे ख्याल से यह काफी बढ़िया विचार है और मैं इसके लिए टी20 फॉर्मैट को सबसे सही मानता हूं.’
यदि आईसीसी के पूर्व सीईओ हारून लॉर्गट की बात की जाए, तो कुछ समय तक यह उनका पसंदीदा प्रॉजेक्ट था. आईसीसी को इंटरनैशनल ओलंपिक कमिटी का मेंबर बनाया गया था, लेकिन यह खेल ओलंपियाड में किस रूप में शामिल होगा, यह अभी भी तय नहीं हो सका है.
इसे लेकर आईसीसी नवंबर में आईओसी से विचार-विमर्श शुरू करने वाली है और तब जाकर इसे 2024 के ओलंपिक में शामिल करने की बात शुरू हो पाएगी.
यह भी कोई राज की बात नहीं है कि आईसीसी के ही कुछ देश, जिनमें भारत और इंग्लैंड प्रमुख हैं, क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किए जाने की कोशिशों का तगड़ा विरोध कर रहे हैं.
पहली बात तो यह है कि जिस महीने में ओलंपिक का आयोजन होता है वही इंग्लैंड में क्रिकेट का सीजन होता है. और अब तो बांग्लादेश, श्रीलंका और वेस्ट इंडीज में भी उस दौरान काफी क्रिकेट खेला जाता है.
इसके साथ ही सदस्यों की अपनी समस्याएं हैं. यदि क्रिकेट ओलंपिक में शामिल होता है तो इंग्लैंड को युनाइटेड किंगडम/ग्रेट ब्रिटेन के बैनर तले खेलना होगा, जिसके अंतर्गत स्कॉटलैंड (आईसीसी का स्वतंत्र असोसिएट मेंबर) और उत्तरी आयरलैंड (आयरलैंड क्रिकेट टीम का हिस्सा) भी आते हैं.
वेस्ट इंडीज को भी अलग-अलग द्वीपीय देशों में विभाजित होना पड़ेगा, क्योंकि वेस्ट इंडीज कई देशों का समूह है, ओर इस प्रकार मुकाबले में वैसी प्रतिस्पर्धा नहीं रह पाएगी, जैसी होनी चाहिए.
इसके बाद मुद्दा है कि इसका स्वरूप कैसा होगा. हालांकि सचिन और वॉर्न का मानना है कि ट्वेंटी20 ओलंपिक के लिए सबसे सही फॉर्मैट है. हकीकत यह है कि 2016 के बाद से पुरुषों का ट्वेंटी20 विश्व कप का आयोजन अब चार साल में एक बार होगा, जबकि महिलाओं का ट्वेंटी20 विश्व कप दो साल में एक बार खेला जाएगा.
वर्ल्ड ट्वेंटी20 के आयोजन का वर्ष ओलंपिक के आयोजन के वर्ष के साथ टकराएगा और इस तरह से इन दोनों का ही महत्व कम हो जाएगा.
स्टार स्पोर्ट्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स को प्रसारण के अधिकार अरबों रुपये में वर्ल्ड टी20 को एक मुख्य आयोजन बताकर बेचे गए हैं. एक ही साल में वर्ल्ड टी20 जैसी ही कोई ओलंपिक प्रतियोगिता इनमें से किसी को स्वीकार नहीं होगी.
आईसीसी इस बात की संभावना खोज रहा है कि ओलंपिक में लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कौन-से दूसरे फॉर्मैट्स पर विचार किया जा सकता है. इनमें से एक सिक्स-अ-साइड है जोकि काफी हद तक हॉन्ग कॉन्ग सिक्सेज से मिलता-जुलता है.
सिक्स-अ-साइड कॉन्टेस्ट इस खेल का मजाक बनाकर रख देगा. जब कोशिश इस बात की हो रही है कि इस दूसरे सबसे लोकप्रिय खेल की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित कराया जाए, तो इसके छोटे वर्जन को लाने की क्या जरूरत है?
बीसीसीआई इसका विरोध भी कर रही है क्योंकि वह इंडियन ओलंपिक असोसिएशन (आईओए) के बैनर तले नहीं आना चाहती. भारत ने सिर्फ एक बार किसी मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में अपनी टीम भेजी थी, और वह था 1998 में कुआलालंपुर में खेला गया कॉमनवेल्थ गेम्स.
वहां की बुरी यादें अभी भी ताजा हैं क्योंकि ठीक उसी समय भारत की टीम ने टोरंटो में पाकिस्तान के खिलाफ एक ऑफिशियल वनडे सीरीज भी खेली थी. दोनों शहरों में खेलने गईं अलग-अलग टीमों की वजह से काफी समस्या पैदा हुई थी और भारत दोनों ही जगह बुरी तरह हारा था.
उसके बाद भारत ने साउथ एशियन गेम्स के साथ-साथ एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेने में रूचि नहीं दिखाई, जबकि बाकी आईसीसी सदस्यों ने इन खेलों में भाग लेने के लिए अपनी जूनियर टीमें भेजी थीं.
पिछली बार जब ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल किया गया था, तबसे 100 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और इस दौरान यह खेल अपने दम पर ही काफी विकसित हुआ है. इसने अपने खुद के दमदार इवेंट्स को विकसित किया और अब इसे ओलंपिक से पहचान पाने की जरूरत नहीं रह गई है.
फुटबॉल की बात की जाए तो उसका भी मुख्य आयोजन फीफा वर्ल्ड कप ही है. हालांकि, ओलंपिक में यह एक अंडर-23 इवेंट के रूप में शामिल है. क्या किसी को 2012 के लंदन ओलंपिक में अच्छा खेलने वाले देशों के नाम याद हैं? फिर क्रिकेट और ओलंपिक को एक-दूसरे के साथ जोड़कर दोनों का कबाड़ा करने की क्या जरूरत है?
क्रिकेट ओलंपिक में दर्शक की भूमिका निभा सकता है, पर इसे इसका हिस्सा होने से बचना चाहिए.
क्रिकेट उन खेलों से अलग है जिन्हें अपनी प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए ओलंपिक की जरूरत पड़ती है. इसके साथ ही इस खेल की प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति का भी मुद्दा है. इस मुकाबले में केवल छह टीमें एक देश के रूप में खेल सकेंगी, जिससे ओलंपिक में क्रिकेट खुद की परछाईं बनकर रह जाएगा.
भले ही क्रिकेट के 105 सदस्य हों, लेकिन सच्चाई यही है कि उनमें से कुछ इतिहास की वजह से जुड़े हैं, कुछ इतिहास की वजह से ही अलग हैं, और कुछ उतने काबिल नहीं है. ऐसे में इस खेल को ऐसे हालात में दुनिया के बाकी दर्शकों के सामने ले जाने की सलाह नहीं दी जा सकती.
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