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वीडियो प्रोड्यूसर: माज़ हसन
वीडियो एडिटर: प्रशांत चौहान
किसी भी मध्यम वर्ग परिवार के लिए खुद का घर होना उसका सबसे बड़ा सपना होता है. हमने भी कुछ ऐसा ही सपना देखा था जिसके लिए हमने 2012 में गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में श्याम बिल्डवेल के बांके बिहारी शरणम प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था.
बिल्डर ने 39 महीनों में फ्लैट देने का वादा किया था, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लाखों होमबॉयर्स की तरह, उसने वादा पूरा नहीं किया, और फ्लैट की डिलीवरी देने में देरी की.
सात साल बाद, 2019 में, हमने अपनी शिकायतों के साथ उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से संपर्क किया.
रेरा आदेश की प्रति
द क्विंट द्वारा एक्सेस की गई छवि
यूपी रेरा ने श्याम बिल्डवेल को 40 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए कहा और अब तक उन्होंने केवल 14.5 लाख रुपये ही जारी किए हैं. देरी के खिलाफ, हम इलाहाबाद हाईकोर्ट भी गए और कोर्ट ने भी हमारे पक्ष में आदेश दिया.
इल.हाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति।
द क्विंट द्वारा एक्सेस की गई छवि.
23 नवंबर 2021, को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में गाजियाबाद के जिलाधिकारी को वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने और एक महीने के भीतर धन प्राप्त करने में मदद करने का निर्देश दिया.
दो महीने हो गए हैं, और उनकी (डीएम) की ओर से कोई अनुरोध नहीं किया गया है. हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट के आदेश पर अमल होगा और डीएम हमें पैसे वसूल करने में मदद करेंगे.
(क्विंट ने श्याम बिल्डवेल के बांके बिहारी शरणम प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट हेड, श्री शांतनु से प्रतिक्रिया के लिए बात की. उन्होंने कहा, “हम इस महीने के अंत तक श्री हरीश सिंह को आधा भुगतान करने का प्रयास करेंगे और फिर फ्लैट सेल पर डालेंगे. एक बार बेचने के बाद, हम कुल राशि का भुगतान करेंगे.")
(सभी 'माई रिपोर्ट' ब्रांडेड कहानियां नागरिक पत्रकारों द्वारा द क्विंट को प्रस्तुत की जाती हैं. हालांकि क्विंट प्रकाशन से पहले सभी पक्षों के दावों/आरोपों की जांच करता है, रिपोर्ट और ऊपर व्यक्त विचार नागरिक पत्रकार के अपने हैं. क्विंट न तो समर्थन करता है, न ही इसके लिए जिम्मेदार है.)