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पटना के गांधी मैदान के पास चर्चित उद्योगपति गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या ने बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है. 4 जुलाई 2025 की रात हुई इस वारदात के बाद राज्य में अपराधियों के हौसले का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगले ही दिन पटना में एक स्कूल के संचालक की हत्या हो गई. राजधानी से लेकर छोटे कस्बों से हत्या की खबरें आ रही हैं, ऐसे हालात में द क्विंट ने सिर्फ जुलाई के पहले हफ्ते में बिहार में हुई कुछ बड़ी आपराधिक घटनाओं को ट्रैक किया है.
4 जुलाई की रात पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक के पास शहर के जाने-माने उद्योगपति गोपाल खेमका की उनके अपार्टमेंट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावर ने प्वाइंट ब्लैंक रेंज से उनके सिर में गोली मारी और फरार हो गया. ये घटना पुलिस स्टेशन से 500 मीटर से भी कम दूरी पर हमलावर ने अंजाम दिया.
जांच में सामने आया कि यह हत्या जमीन विवाद को लेकर बिल्डर अशोक साह के इशारे पर कराई गई थी. अशोक ने शूटर उमेश से संपर्क किया, जिसने आगे अपने साथी विकास उर्फ राजा को सुपारी देने की कोशिश की, लेकिन पैसों पर विवाद के चलते उमेश ने खुद ही हत्या कर दी. अब बिल्डर अशोक साह और शूटर उमेश पुलिस हिरासत में हैं.
एडीजी कुंदन कृष्णन ने कहा-
गोपाल खेमका मर्डर केस का खुलासा करते हुए बिहार पुलिस
फोटो: बिहार पुलिस
वहीं फरार चल रहे शूटर विकास उर्फ राजा को पुलिस ने दमरिया घाट के पास मुठभेड़ में मार गिराया. पुलिस के मुताबिक, विकास भी खेमका की हत्या की सुपारी की बातचीत में शामिल था, लेकिन पैसों को लेकर उमेश से उसका विवाद हो गया था.
मधुबनी जिले के फुलपरास थाना क्षेत्र के बोहरबा गांव में देर रात 65 वर्षीय किसान बद्री यादव को अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी. बद्री यादव को घर से जबरन उठाकर तीन किलोमीटर दूर नदी किनारे ले जाया गया और गोली मार दी गई. शव सुग्गा पट्टी पुल के पास बरामद हुआ.
फुलपरास थानाध्यक्ष पवन कुमार के मुताबिक, संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
महनार के लावापुर नरायण गांव में रविवार को 55 वर्षीय सुरेंद्र झा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह अपने समधी विजय झा के यहां रुपये और जमीन विवाद सुलझाने पहुंचे थे, तभी बाइक सवार बदमाशों ने सिर और सीने में गोली मार दी.
पुलिस ने तीन लोगों पर प्राथमि की दर्ज कर और जांच शुरू की है.
पूर्णिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के टेटगामा गांव में स्थानीय लोगों ने डायन का आरोप लगाकर एक ही परिवार के पांच लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी. मृतकों में बाबूलाल उरांव, उनकी पत्नी, मां, बहू और बेटा शामिल हैं. गांव के करीब 50 लोग अचानक उनके घर में घुस आए और पूरे परिवार को पीट-पीटकर तथा जिंदा जलाकर मार डाला. इसके बाद शवों को बोरों में भरकर गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर तालाब में फेंक दिया गया.
पीड़ित बेटे ने बताया कि हमलावरों ने उसकी आंखों के सामने उसके पूरे परिवार को पीटा और मारा.
पुलिस ने अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी की तलाश में छापेमारी जारी है.
नालंदा के दीपनगर थाना के डुमरावां गांव में पुराने विवाद में दो किशोरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने घर में घुसकर धारदार हथियार और बंदूक से हमला किया. घटना के बाद 18 लोगों पर केस दर्ज हुआ और सात को गिरफ्तार किया गया.
दानापुर में निजी स्कूल चलाने वाले 50 वर्षीय अजीत कुमार की 6 जुलाई को देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई. बाइक सवार हमलावरों ने डीएवी स्कूल के पास उन्हें सिर में गोली मारी. घटना के वक्त अजीत अपने पिता के लिए खाना देकर लौट रहे थे. खून से लथपथ हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाने में पंचायत रोजगार सेवक मुमताज अहमद की घर में घुसकर गला रेतकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने चाकू से 12 वार किए और घर से लाखों रुपये व जेवर लूट लिए. कमरे में खून से लथपथ शव मिला. हत्या के पीछे रंजिश और लूट दोनों की आशंका जताई जा रही है.
सिटी एसपी कोटा किरण ने बताया कि मौके से चाकू बरामद हुआ है, FSL और डॉग स्क्वॉड की मदद से जांच की जा रही है. आसपास के CCTV खंगाले जा रहे हैं.
महालगांव थाना क्षेत्र के ककौड़ा गांव में शनिवार रात पुश्तैनी जमीन विवाद में छोटे भाई रहमान ने बड़े भाई मोदस्सीम पर फायरिंग कर दी. गोली उनके 12 वर्षीय बेटे अबु होरेरा को लगी जिससे उसकी मौत हो गई, जबकि मोदस्सीम घायल हो गए.
पुलिस ने आरोपी रहमान को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल देसी कट्टा और गोली बरामद की है.
सीवान के मलमलिया में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई. एक को गोली मारी गई जबकि दो को तलवार से काट डाला गया. वहीं दो घायल हैं, जिनका इलाज जारी है. मृतकों की पहचान मुन्ना सिंह, रोहित सिंह और कन्हैया सिंह के रूप में हुई.
पुलिस ने अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया और थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया.
समस्तीपुर के रोसड़ा में पंचायत समिति सदस्य मंजू देवी के पति सुरेश महतो को रंगदारी न देने पर गोली मार दी गई. गंभीर रूप से घायल सुरेश ने बताया कि चार बाइक सवारों ने घेरकर हमला किया. पुलिस का कहना है कि यह आपसी विवाद का मामला हो सकता है.
बेगूसराय के सिंघौल थाना क्षेत्र के फतेहपुर में स्वर्ण कारोबारी सुनील कुमार की हत्या कर दी गई. 4 जुलाई की सुबह उसका शव चारदीवारी में मिला. जांच में सामने आया कि उसकी प्रेमिका के पति ने हत्या की साजिश रची. पुलिस ने सुनील की प्रेमिका, उसके पति और नाबालिग साली को गिरफ्तार किया है.
मुरलीगंज के दमगारा टोला में 3 जुलाई की रात सब्जी विक्रेता दिनेश दास (50) और उनकी पत्नी भलिया देवी (45) की हत्या कर दी गई. शव अगले दिन ग्रामीणों को मिले. आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की. पुलिस के मुताबिक मामला जमीनी विवाद का है.
बिस्फी थाना क्षेत्र के सिमरी गांव में मोहम्मद तुफैल को गांव के ही मोहम्मद आफताब उर्फ अलताब ने आपसी रंजिश में चाकू मारकर घायल कर दिया. परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
पुलिस ने एसआईटी गठित कर 7 जुलाई 2025 को दरभंगा स्टेशन से आरोपी मोहम्मद आफताब को गिरफ्तार किया.
बिहार में हत्या के मामलों के आंकड़े लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) और स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (SCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 से 2022 के बीच बिहार में कुल 23,522 हत्या के मामले दर्ज हुए. अगर साल-दर-साल आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि राज्य में हर साल औसतन करीब 3,000 लोगों की हत्या होती है.
साल 2015 से 2022 तक बिहार में हत्याओं के आंकड़े
ग्राफिक्स: द क्विंट
इन आंकड़ों से साफ है कि हत्या की घटनाओं में उतार-चढ़ाव तो जरूर आया, लेकिन औसत 2,800 से 3,100 के बीच ही बना हुआ है. खास बात यह है कि कोविड महामारी के दौरान (2020) भी बिहार में हत्या के मामलों में कोई गिरावट नहीं आई, बल्कि उस साल यह आंकड़ा 3,150 तक पहुंच गया.
पिछले कुछ महीनों में राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार चढ़ता जा रहा है. हत्याएं, लूट, अपहरण और फिरौती जैसी वारदातें आए दिन हो रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. विपक्ष मौजूदा एनडीए सरकार पर हमलावर है और बिहार को "क्राइम कैपिटल" की संज्ञा दे चुका है.
बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, "बिहार की कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. कोई ऐसा जिला नहीं है जहां गैंगरेप, हत्या, अपहरण या लूटपाट न हो रही हो. NDA के शासन में अब तक 65,000 हत्याएं हो चुकी हैं, फिर भी इसे मंगलराज कहा जाता है. मजाल है कि अचेत मुख्यमंत्री किसी घटना पर कोई बयान दे सकें?"
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि गोपाल खेमका हत्याकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है - बीजेपी और नीतीश कुमार ने मिलकर बिहार को "भारत की क्राइम कैपिटल" बना दिया है. आज बिहार लूट, गोली और हत्या के साए में जी रहा है. अपराध यहां 'नया नॉर्मल' बन चुका है - और सरकार पूरी तरह नाकाम.
हालांकि बढ़ती घटनाओं पर जेडयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा, "लालू-राबड़ी शासन में संगठित अपराध और नरसंहार होते थे, लेकिन क्या कार्रवाई होती थी? आज घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं, लेकिन तुरंत कार्रवाई होती है और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है. लोग आधी रात में भी सुरक्षित सड़कों पर निकल सकते हैं."