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महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM एक 'सरप्राइज विनर' बनकर उभरी है. खबर लिखे जाने तक, AIMIM पूरे राज्य में 94 वार्डों पर या तो जीत दर्ज कर चुकी थी या आगे चल रही थी.
इस प्रदर्शन के साथ ही AIMIM महाराष्ट्र की छठी सबसे सफल पार्टी बन गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ओवैसी की पार्टी ने शरद पवार की NCP (शरद चंद्र पवार) और राज ठाकरे की मनसे (MNS) जैसी बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया है.
AIMIM को सबसे ज्यादा फायदा खानदेश और मराठवाड़ा के शहरी इलाकों में मिला है.
मालेगांव नगर निगम में AIMIM सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी, लेकिन अपने दम पर बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई. खबर लिखे जाने तक, पार्टी 20 वार्डों में जीत चुकी थी या आगे चल रही थी.
संभाजीनगर (औरंगाबाद), नांदेड़ वाघाला और धुले में AIMIM दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इसके अलावा, पार्टी ने अमरावती और जालना में भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है.
नगर निगम चुनावों में AIMIM का यह प्रदर्शन 2024 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले काफी बेहतर है। 2024 में पार्टी ने मालेगांव सेंट्रल सीट जीती थी और औरंगाबाद ईस्ट में बहुत करीबी मुकाबले में दूसरे नंबर पर रही थी.
चुनाव के ये नतीजे साफ इशारा कर रहे हैं कि कुछ खास इलाकों में मुस्लिम वोटों का मिजाज बदला है. ऐसा लग रहा है कि कम से कम स्थानीय निकाय (लोकल बॉडी) चुनावों में यह समुदाय अब सिर्फ महाविकास अघाड़ी (MVA) के भरोसे रहने के बजाय AIMIM को भी मौका देने के लिए तैयार है. इसकी एक बड़ी वजह महाविकास अघाड़ी में फूट भी हो सकती है, क्योंकि शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार) कई जगहों पर अलग-अलग चुनाव लड़े थे.
हालांकि, जिन इलाकों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया जैसे कि भिवंडी निजामपुर वहां AIMIM का जादू उस तरह नहीं चल पाया.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में AIMIM की यह कामयाबी नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में मिली 5 सीटों की जीत के ठीक बाद आई है, जिससे पार्टी के हौसले बुलंद हैं.
(हिंदी अनुवाद: नौशाद मलूक)