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SSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन टीचर की 'राजनीति' में बिखर गया?

आंदोलन को लेकर सवाल भी उठे.आलोचकों का कहना था कि शिक्षक नेता छात्रों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

शादाब मोइज़ी
जनाब ऐसे कैसे
Published:
<div class="paragraphs"><p><strong>SSC की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ हज़ारों छात्र और शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए.</strong></p></div>
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SSC की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ हज़ारों छात्र और शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए.

फोटो: क्विंट लैब द्वारा प्राप्त

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24 अगस्त को कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में हजारों छात्र और शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटे. प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और अन्य गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जताई.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग किया, कई छात्रों और शिक्षकों को हिरासत में लिया गया और इस दौरान कई लोग घायल भी हुए. छात्रों ने कहा, “लोगों को मंच से नीचे फेंका जा रहा था, छात्रों को लातें मारी जा रही थीं और शिक्षकों के स्टूल तोड़ दिए गए.”

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प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार निजी एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई हो और बार-बार छात्रों को फेल करने वाले परीक्षा केंद्रों को ब्लैक लिस्ट किया जाए.

द क्विंट ने प्रदर्शन कर रहे एक छात्रों से बातचीत की. इस साल एसएससी का एग्जाम देने वाले मनवीर सिंह नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं,

"मैंने इस बार SSC का फेज-13 एग्जाम दिया था. परीक्षा के दौरान मुझे बहुत दिक्कतें आईं मेरा कंप्यूटर तीन बार बंद हुआ. जो इनविजिलेटर वहां थे, वो बस अपनी फॉर्मेलिटी पूरी कर रहे थे, उन्हें ठीक से संभालना ही नहीं आता था. ऐसा लगा जैसे अनुभवहीन लोगों को वहां ड्यूटी पर बैठा दिया गया हो. मैंने परीक्षा केंद्र पर शिकायत भी की, लेकिन जवाब मिला कि 'कोई नहीं, आगे से हो जाएगा'. इससे ज्यादा कुछ नहीं किया गया. एक और बड़ी समस्या यह थी कि सिस्टम पर इतना डाटा भेजा जा रहा था कि कंप्यूटर हैंग हो रहा था. नतीजा ये हुआ कि परीक्षा के दौरान बार-बार रुकावट आई."

एक और छात्र ने अपने आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए कहा,

हम बिहार से हैं, हमारी मांग बस इतनी है कि परीक्षा सेंटर पास के राज्यों में दिया जाए यूपी या झारखंड. लेकिन SSC सेंटर ऐसे भेज रहा है कि ₹500–₹300 फीस के बावजूद हमें यात्रा में ही ₹1500–₹2000 खर्च करना पड़ रहा है. हममें से कई लोग इतने सक्षम नहीं हैं कि ये खर्च उठा सकें. दूसरी बड़ी समस्या ये है कि जब चुनाव आता है तभी 14–15 हजार पदों की भर्ती निकाल दी जाती है, इसकी जरुरत क्या है सालों साल तक सिर्फ 2–3 हजार पदों पर ही भर्ती निकालों और फिर 4–5 साल तक सब ठप पड़ा रहता है. ये सबसे ज्यादा निराश करता है.
SSC अभ्यर्थी

शिक्षकों की राजनीति और आंदलोन बिखर गया?

इस आंदोलन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. दरअसल, 24 अगस्त को जब दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन बुलाया गया था तब केवल शाम 5 बजे तक की ही प्रदर्शन की अनुमति मिली थी. इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मैदान खाली करने को कहा, लेकिन बताया जाता है कि छात्र वहां से हटने को राजी नहीं हुए. इसके बाद झड़प हुई, लाठीचार्ज हुआ और छात्रों-शिक्षकों को वहां से खदेड़ा गया. अब रामलीला मैदान में आंदोलन को पुलिस द्वारा समाप्त कराए जाने के बाद शिक्षकों के बीच की लड़ाई भी सामने आई है.

द क्विंट ने आंदोलन में शामिल एजुकेटर आदित्य रंजन से बातचीत की. क्विंट ने आदित्य रंजन से पूछा कि जब प्रदर्शन आपके (शिक्षकों) आह्वान पर हुआ और देशभर से छात्र दिल्ली पहुंचे थे, तो क्या उनके लिए ठहरने की व्यवस्था पहले से नहीं होनी चाहिए थी? जब रात में अनुमति ही नहीं थी, तो फिर पुलिस क्यों उन्हें रुकने देती?

जवाब में आदित्य रंजन ने द क्विंट से कहा,

“यह बिल्कुल सही है कि रात के लिए हमारे पास अनुमति नहीं थी. हमें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही धरने की इजाजत मिली थी. लेकिन समस्या तब आई जब पुलिस छात्रों से कह रही थी कि वे तुरंत मैदान छोड़कर कहीं और चले जाएं. अब सोचिए, जब 4–5 हजार छात्र मैदान में बैठे हों, तो उन्हें अचानक सड़कों पर भेज देना कितना खतरनाक हो सकता था. हमें डर था कि कहीं वे बाहर निकलकर उपद्रव न कर दें या इंडिया गेट की ओर मार्च न कर दें. इसी वजह से सभी शिक्षकों ने मिलकर पुलिस को अंडरटेकिंग दी कि रात में धरना नहीं होगा. हमने उनसे कहा कि आप चाहें तो लाइटें काट दीजिए, लेकिन बच्चों को मैदान में रुकने दीजिए. हमारे पास टेंट, पानी और खाने की व्यवस्था थी. बच्चे आराम कर लेते और सुबह फिर से प्रोटेस्ट होता. लेकिन पुलिस का कहना था कि ‘रात में मत रुको, सुबह आ जाना.’ हमें यह भी डर था कि ऊपर से मंत्रालय का आदेश आ चुका था कि जैसे ही छात्र मैदान खाली करेंगे, अगले दिन की अनुमति रद्द कर दी जाए. और वही हुआ अगले दिन का परमिशन कैंसिल कर दिया गया.”

आदित्स रंजन ने एसएससी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा,

SSC की अलग-अलग परीक्षाओं में समय-समय पर अनियमितताएं सामने आती रही हैं. पहले जब TCS परीक्षा आयोजित करता था, तब अधिकतर समस्याएं कीबोर्ड, माउस या सिस्टम से जुड़ी छोटी-छोटी तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित रहती थीं. इन मुद्दों को लेकर छात्रों और संगठनों ने कई बार SSC चेयरमैन को ज्ञापन भी सौंपा. उम्र (Age) से जुड़ा मुद्दा भी बार-बार उठाया गया. इनमें से कुछ समस्याएं समय पर हल हो जाती थीं, जबकि कुछ लंबित रह जाती थीं. TCS का टेंडर 2024 में समाप्त हो गया. 2025 की शुरुआत तक इसे अस्थायी तौर पर बढ़ाया गया, लेकिन बाद में नया वेंडर चुना गया. सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी Adequity को परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी मिली. Adequity ने सबसे पहले Selection Phase-13 की परीक्षा कराई और यहीं से गंभीर समस्याएं शुरू हो गईं. सबसे पहले एडमिट कार्ड की गड़बड़ी सामने आई. छात्रों को 500–600 किलोमीटर दूर सेंटर अलॉट कर दिए गए. जब छात्र वहां पहुंचे, तो उन्हें सर्वर इश्यू का सामना करना पड़ा. कई बार तो परीक्षा ही कैंसिल करनी पड़ी. कई केंद्रों पर सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर थे. मोबाइल फोन तक अंदर ले जाए जा रहे थे. कुछ इनविजिलेटर एक हाथ में सिगरेट लिए हुए थे और दूसरे हाथ से एडमिट कार्ड की चेकिंग कर रहे थे. ऐसे माहौल में छात्रों को परीक्षा देनी पड़ी.
आदित्य रंजन, एजुकेटर

आंदोलनकर्ताओं की मांग

  • SSC Selection Post Phase XIII और SSC Stenographer Grade C & D, 2025 की परीक्षा रद्द कर पुनः आयोजित की जाए.

  • वर्तमान अयोग्य वेन्डर्स (परीक्षा आयोजित करने वाले व प्रश्न बनाने वाली एजेंसी) को तुरंत बदलकर ऐसे सक्षम वेन्डर्स को नियुक्त किया जाए जिनके पास निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी वाली परीक्षाएँ कराने का अनुभव हो.

  • जब तक भरोसेमंद वेन्डर और मजबूत व्यवस्था उपलब्ध न हो, तब तक आगामी SSC परीक्षाएं स्थगित की जाएं.

  • "स्टूडेंट्स कमीशन ऑफ इंडिया" का गठन किया जाए, जिसमें शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) और परीक्षा सलाहकार बोर्ड (Exam Advisory Board) शामिल हों.

  • SSC परीक्षा प्रक्रिया का मानकीकरण किया जाए समय पर परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए, फाइनल आंसर-की पोस्ट प्रेफरेंस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से पहले जारी की जाए, तथा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फाइनल रिजल्ट से पहले किया जाए.

  • रेलवे परीक्षाओं का मानकीकरण किया जाए समय पर परीक्षा कैलेंडर जारी हो, सभी परीक्षाएं समय पर और हर साल नियमित रूप से आयोजित हो, तथा अन्य बड़े सुधार लागू किए जाए.

  • गलत प्रश्न बिल्कुल न पूछे जाएँ और प्रत्येक विषय के लिए मानक स्रोत (Standard Sources) तय किए जाएं.

  • टियर-2 परीक्षा में प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि भाग्य पर नहीं बल्कि जान पर चयन आधारित हो.

  • सभी वार्षिक परीक्षाओं के लिए आयु निर्धारण की तिथि 1 जनवरी तय की जाए और परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु-छूट दी जाए.

  • सरकारी विभागों में सभी रिक्त पर्दा को भरा जाए.

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