Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Janab aise kaise  Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Gen Z के निशाने पर अब कौन? सोनम वांगचुक-CJP की विचारधारा पर नेहा का जवाब

Gen Z के निशाने पर अब कौन? सोनम वांगचुक-CJP की विचारधारा पर नेहा का जवाब

जंतर मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठने वाली AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा से खास बातचीत.

Shadab Moizee
जनाब ऐसे कैसे
Published:
<div class="paragraphs"><p><strong>नीट (NEET) पेपर लीक  के खिलाफ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक चले  आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद  AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 'द क्विंट' से खास बातचीत की.</strong></p></div>
i

नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक चले आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 'द क्विंट' से खास बातचीत की.

(फोटो- नौशाद मलूक)

advertisement

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो हो गया लेकिन अब आगे क्या? Gen Z के निशाने पर अब कौन है? "वो व्यक्ति जिसने 20 जुलाई को पैलेट गन इस्तेमाल करने का आर्डर दिया था." ये जवाब है नीट (NEET) पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाली नेहा बोरा का है.

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 'द क्विंट' से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है और अब अगला निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं.

"धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई छोटी बात नहीं"

NEET विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसके बाद जंतर-मंतर पर छात्रों के जश्न के वीडियो ('छैयां छैयां' डांस) पर छिड़े विवाद पर नेहा ने जवाब देते हुए कहा,

इस आंदोलन में हमारा खून-पसीना, मेहनत और आंसू लगे हैं. सत्ता में बैठी ताकतें बेहद जिद्दी और घमंडी हैं, उन्हें झुकाना और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना कोई सामान्य बात नहीं है. अगर सत्ता पक्ष को आपका खुश रहना नागवार गुजरता है, तो आपको और खुश रहना चाहिए. हमारे जश्न ने सरकार की अना (अहंकार) को झकझोर कर रख दिया है. उसको तो हम छैयां छैयां से भी और हिल्ले ले झगझोर दुनिया जैसे गाने पर नाच करके दर्ज करवाएंगे कि तुम तो हारे हो और तुम्हारे लिए हार कोई छोटी बात नहीं है. हमें मालूम है खून का घूंट पिया है तुमने, हम इतने सालों से पी रहे हैं खून का घूंट एक बार तुम भी पियो."

23 दिन की भूख हड़ताल और मानसिक तनाव

जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक चली भूख हड़ताल के कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए नेहा ने बताया कि एक सार्वजनिक स्थान पर लगातार 12-12 घंटे लाउडस्पीकर के बीच रहना और शारीरिक जांच का लगातार जनता के सामने होना मानसिक रूप से थका देने वाला था.

हड़ताल मानसिक रूप से बहुत थका देने वाला था हमारे लिए क्योंकि हम लोगों से घिरे हुए थे. मतलब अगर ब्लड शुगर जांचने के लिए हमारा खून लिया जाता, तब भी 10 लोग बैठकर देखते रहते. सबको रीडिंग देखना था. हम वेइंग मशीन पे चढ़ते थे कि कितना वजन कम हुआ तो सब ऐसे रुक जाते थे और आसपास ऐसे गोला बना लेते थे कि कितना वजन कम हुआ है. तो अपनी बॉडी का एहसास बहुत जबरदस्त तरीके से हुआ. मैंने ईसीजी करवाया तीन बार जंतर मंतर पर. मतलब ईसीजी में वो आपके कपड़े खोलकर वो प्लग इन करते हैं. वो भी जंतर मंतर पर हो गया. वहां सब कुछ सार्वजनिक (public) हो गया था.

घर में 'राइट' और बाहर 'लेफ्ट'

नेहा का बैकग्राउंड काफी दिलचस्प है. उनके पिता आर्मी में हैं और मां बीजेपी की समर्थक रही हैं. स्कूल के दिनों में ही पाब्लो नेरुदा, अरुंधति रॉय और आगा शाहिद अली जैसे लेखकों को पढ़ने तथा कॉलेज में पॉलिटिकल थिएटर करने से उनका वैचारिक बदलाव हुआ. नेहा कहती हैं,

मेरा हृदय परिवर्तन स्कूल के दिनों में ही वामपंथी कवियों और लेखकों को पढ़कर हो गया था.

दिलचस्प बात यह है कि जब 22वें दिन उनकी मां उनसे मिलने आईं, तो उन्होंने देखा कि जिन लोगों से वे राजनीतिक रूप से असहमत हैं, वही उनकी बेटी का ख्याल रख रहे हैं. नेहा के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनकी मां ने सबको बधाई भी दी.

सोनम वांगचुक और विचारधारा की लड़ाई

भूख हड़ताल में साथ बैठे सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी के वैचारिक रुख पर नेहा ने साफ किया कि 'हिंदुत्व' या 'हिंदू राष्ट्र' की उनकी अवधारणा और नई शिक्षा नीति (NEP) पर AISA का उनसे सीधा डिसअग्रीमेंट (असहमति) है.

हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए एक साथ आए थे, लेकिन हमारी और उनकी राजनीति में जमीन-आसमान का फर्क है.

"गद्दारी करूंगी तो अप्रासंगिक हो जाऊंगी"

हाल के दिनों में कई युवा चेहरों (जैसे राघव चड्ढा, सायनी घोष या अन्य नेताओं) द्वारा राजनीतिक विचारधारा बदलने या कहें यू-टर्न लेने के सवाल पर नेहा बोरा ने कहा,

अगर कोई नेता जनता के संघर्षों से मुंह मोड़ लेता है, तो वह जनता की नजरों में इररेलिवेंट (अप्रासंगिक) हो जाता है, चाहे वह सत्ता के सामने कितना भी झुक जाए. जिस दिन मैं अपने सिद्धांतों और जनता से गद्दारी करूंगी, उस दिन मैं भी इररेलिवेंट हो जाऊंगी.
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

20 तारीख को पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?

इंटरव्यू के दौरान नेहा बोरा ने 20 तारीख को दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन और पेलेट गन्स (Pellet Guns) के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए.

नेहा ने आरोप लगाते हुए कहा,

सेंट्रल दिल्ली में आम प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने का फैसला बिना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इजाजत के नहीं हो सकता. पेलेट गन के हमले से एक छात्र की आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई, कई छात्रों के सुनने की क्षमता प्रभावित हुई. इस तबाही की पूरी जिम्मेदारी अमित शाह की है और अब छात्रों की मांग उनके इस्तीफे को लेकर होगी.

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT