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हार्ट स्टेंट को लेकर उलझन में हैं? डॉक्टर से समझें पूरी बात

क्या है हार्ट स्टेंट और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

डॉ राहुल छाबड़िया
फिट
Updated:
 स्टेंटिंग का फैसला दिल की धमनी में ब्लॉकेज के लोकेशन, रोगी के लक्षण और गंभीरता पर निर्भर करता है.
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स्टेंटिंग का फैसला दिल की धमनी में ब्लॉकेज के लोकेशन, रोगी के लक्षण और गंभीरता पर निर्भर करता है.
(फोटो: iStockphoto)

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(भारत में जितनी तेजी से दिल की बीमारियों से पीड़ित होने वालों की तादाद बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से ऐसे मरीज भी बढ़ रहे हैं, जिन्हें हार्ट स्टेंट की जरूरत है. स्टेंट की सलाह क्यों दी जाती है? स्टेंट को लेकर आप कैसे कोई फैसला कर सकते हैं? इन सभी सवालों का जवाब दे रहे हैं मुंबई के जसलोक अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ राहुल छाबड़िया.)

जिन लोगों की हार्ट आर्टरीज (हृदय धमनियों) में ब्लॉकेज होती है, उन्हें एंजियोप्लास्टी और स्टेंट इंप्लांटेशन कराने को कहा जा सकता है. स्टेंटिंग का फैसला दिल की धमनी में ब्लॉकेज के लोकेशन, रोगी के लक्षण और गंभीरता पर निर्भर करता है.

आमतौर पर धमनी में स्टेंट तब डाला जाता है, जब एंजियोप्लास्टी के दौरान वो गुब्बारे के जरिए बढ़ी होती है. एंजियोप्लास्टी के बाद, जब स्टेंट धमनी की दीवारों को सपोर्ट करने लगता है तो दीवारों को फिर से संकुचित कर दिया जाता है. यह प्रक्रिया ग्रोइन आर्टरी (जांघ की धमनी) या फोरआर्म आर्टरी (कलाई की धमनी) में एक छोटे छेद के जरिए की जाती है.

यह कैसे किया जाता है?

जांघ या कलाई में एक छोटी सुई लगाने के बाद उतनी जगह पर कुछ महसूस नहीं होता. फिर एक खोखली ट्यूब कैथेटर धमनी से अंदर घुसाई जाती है, इसके शुरुआती सिरे तक. कैथेटर की नोक पर स्थित स्टेंट, गुब्बारे पर चढ़ाया जाता है. स्टेंट धमनी में स्थाई रूप से रहता है ताकि दिल की ओर रक्त प्रवाह बना रहे.

एक छोटी सुई लगाने के बाद उतनी जगह पर कुछ महसूस नहीं होता (प्रतीकात्मक फोटो: iStockphoto)

ब्लॉकेज पर, गुब्बारा फुलाया जाता है और धमनी के अंदर स्टेंट फैलता है और फिर वहीं पर फिक्स हो जाता है.

एक बार जब स्टेंट अपनी जगह पर आ जाता है, तो बैलून कैथेटर हटा दिया जाता है और इमेजेज (एंजियोग्राम) लेकर यह देखा जाता है कि चौड़ी हुई धमनी से रक्त का प्रवाह कितनी अच्छी तरह हो रहा है. 

एक बार लगा दिए जाने के बाद, स्टेंट जीवन भर वहीं रहता है और हटता नहीं है. स्टेंट प्लेसमेंट के बाद, डॉक्टर आमतौर पर एंटी-प्लेटलेट नाम की ‘ब्लड थिनिंग (रक्त-पतला करने की)’ दवाओं से इलाज शुरू करते हैं.

स्टेंट क्या है?

स्टेंट छोटे एक्सपेंडेबल ट्यूब होते हैं, जो शरीर में संकुचित या कमजोर धमनियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. कोरोनरी आर्टरी डिसीज (CAD) वाले मरीजों में, स्टेंट का इस्तेमाल संकुचित धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है, जिससे छाती के दर्द (एंजिना) जैसे लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है या हार्ट अटैक का इलाज करने में मदद मिलती है. इस तरह के स्टेंट को आमतौर पर हार्ट स्टेंट कहा जाता है, लेकिन इन्हें कार्डियक या कोरोनरी स्टेंट भी कहते हैं.

आमतौर पर धातु की जाली से बने, हार्ट स्टेंट को परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (PCI) नाम की प्रक्रिया के जरिए संकीर्ण कोरोनरी धमनियों में लगाया जाता है. स्टेंट धमनी को फिर से अवरुद्ध (ब्लॉक) होने से रोकने में मदद करते हैं (recoiling).

स्टेंट फैल सकने योग्य छोटे ट्यूब होते हैं, जो शरीर में संकुचित या कमजोर धमनियों के इलाज के लिए उपयोग किए जाते हैं. (फोटो: iStockphoto)
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वर्तमान में तीन तरह के स्टेंट मौजदू हैं:

  • बेयर मेटल स्टेंट (BMS)
  • ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES)
  • बायोरिजॉर्बेबल वस्कुलर स्केफोल्‍ड (BVS)

1. बेयर मेटल स्टेंट (BMS)

ये सबसे पुराने उपलब्ध स्टेंट हैं और पहली बार 1986 में क्लिनिकल ट्रायल में इस्तेमाल किए गए थे. बेयर मेटल स्टेंट या धातु के सादे स्टेंट (BMS) आमतौर पर स्टेनलेस स्टील के बने होते हैं और इन पर दवा की कोई विशेष कोटिंग नहीं होती है. ये गुब्बारे से फैलाव के बाद धमनियों को खुला रखने का काम करते हैं. हालांकि, कभी-कभी धमनियों की लाइनिंग में स्कार टिश्यू की अत्यधिक वृद्धि से फिर से अवरोध का खतरा बढ़ जाता है. ड्रग लेपित स्टेंट के मुकाबले BMS की यह बड़ी खामी है. समय के साथ अब इन स्टेंटों का उपयोग काफी कम हो गया है.

आजकल, BMS का एकमात्र इस्तेमाल उन मरीजों में होता है जिनकी निकट भविष्य में कुछ प्रमुख सर्जरी होनी है या मरीज रक्त पतला करने वाली दवाओं (एंटी-प्लेटलेट एजेंट) के प्रति असहनशील है. कभी-कभी इसे रोगियों में ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (आगे समझाया गया है) के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है, जो DES का खर्च नहीं उठा सकते हैं.

2. ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES)

ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट्स या ड्रग लेपित स्टेंट (DES) दवाई से कोटेड होते हैं, जो स्कार टिश्यू के ग्रोथ को रोकने के लिए आर्टरी लाइनिंग में रिलीज होते हैं. इन्हें पहली बार 1999 में इस्तेमाल किया गया था और यह हृदय धमनियों में ब्लॉकेज वाले मरीजों के इलाज की प्रमुख खोजों में से एक था. ये स्टेंट धमनी को सुचारु और खुला रखते हैं, अच्छे रक्त प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं और आर्टरी या रेस्टेनोसिस के पुन: संकीर्ण होने की आशंका को कम कर देते हैं. हालांकि, इनसे रक्त के थक्के (स्टेंट थ्रोम्बिसिस) की ज्यादा आशंका होती है.

पिछले कुछ वर्षों में, स्टेंट की सतह पर कई दवाओं का परीक्षण किया गया है. (फोटो: iStockphoto)

पिछले कुछ वर्षों में, स्टेंट की सतह पर कई दवाओं का परीक्षण किया गया है. यह दवा धीरे-धीरे आसपास के ऊतक में रिलीज होती है और स्टेंट के अंदर नए ऊतकों की वृद्धि को रोकती है. इसकी अधिकतम संभावना स्टेंट प्लेसमेंट के शुरुआती कुछ महीनों में होती है. इसलिए, अधिकांश स्टेंट दवाओं के साथ इस तरह से लेपित किए जाते हैं कि अगले कुछ महीनों में दवा धीरे-धीरे रिलीज हो.

ठीक होने की अपेक्षाकृत धीमी प्रक्रिया के कारण, DES प्रत्यारोपित मरीजों को स्टेंट थ्रोम्बिसिस का जोखिम कम करने के लिए रक्त पतला करने वाली दवाओं को लेकर डॉक्टर की नसीहत का सख्ती से पालन करना चाहिए.

3. बायोरिजॉर्बेबल वस्कुलर स्केफोल्ड (BVS)

बायोरिजॉर्बेबल वस्कुलर स्केफोल्ड (BVS) एक ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट है, ये शरीर में विघटित हो जाने वाले स्कैफोल्ड (जाले) प्लेटफॉर्म पर होता है, जो समय के साथ शरीर में अवशोषित हो जाती है. अवधारणा यह है कि कुछ महीनों में, धमनी खुद को फिर से तैयार करती है और तब किसी भी स्टेंट के मेटल स्केफोल्डिंग (धातु के जाले) की जरूरत नहीं रह जाती है. वर्ष 2011 में, BVS एक बड़े धमाके के साथ आया था और दुनिया भर में इस्तेमाल किया गया. हालांकि शुरुआती नतीजे शानदार थे, लेकिन लंबे समय में, इसने परंपरागत DES से भी बदतर प्रदर्शन किया और अब परंपरागत स्टेंट का ही इस्तेमाल किया जाता है. कंपनी ने खुद इसको 2017 में बाजार से वापस ले लिया.

बेयर मेटल स्टेंट की भूमिका सीमित है. हालांकि विघटित हो जाने वाले स्टेंट सैद्धांतिक रूप से शानदार थे, लेकिन इसे रोगियों के फायदे में परिवर्तित नहीं किया जा सका. रोगियों में परिणामों में सुधार के लिए बेहतर डिजाइन के साथ BVS पर कई परीक्षण चल रहे हैं. हालांकि वर्तमान की बात करें तो, ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट ही ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

(डॉ राहुल छाबड़िया जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, मुंबई में कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट हैं.)

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Published: 24 Oct 2018,03:10 PM IST

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