Home Hindi Fit बर्थमार्क्स: कब जरूरी हो जाता है डॉक्टर को दिखाना?
बर्थमार्क्स: कब जरूरी हो जाता है डॉक्टर को दिखाना?
जानिए बर्थमार्क्स यानी जन्मजात निशान को लेकर थोड़ी जागरुकता क्यों जरूरी है.
साखी चड्ढा
फिट
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क्या बर्थमार्क्स हमेशा नुकसान करने वाले नहीं होते हैं?
(फोटो: iStockphoto)
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कई लोगों के शरीर पर कुछ निशान होते हैं, जिन्हें जन्मजात निशान या बर्थमार्क्स कहते हैं. आपने इसके बारे में जरूर सुना होगा या देखा भी होगा. संभव है कि आप में से कई लोगों की बॉडी पर ये बर्थमार्क्स हों.
आपकी बॉडी पर बर्थमार्क्स की जगह या उसके आकार से तय होता है कि आप उसकी बहुत कम परवाह करते हैं या फिर जिंदगी भर के लिए वह आपको सताता है या आपके दिमाग में घर कर लेता है. हालांकि, आपके कॉलरबोन (गले और कंधे को जोड़ने वाली हड्डी) पर एक छोटा सा मस्सा या तिल चिंता का कारण नहीं हो सकता है.
फिर भी ऐसे कई कारण हैं, जिससे तय होता है कि बर्थमार्क्स के बारे में थोड़ी जागरुकता क्यों जरूरी है. जानिए एक्सपर्ट इसके बारे में क्या कहते हैं.
क्या होते हैं बर्थमार्क?
ज्यादातर मामलों में बर्थमार्क्स से कोई नुकसान नहीं होता.(फोटो: iStockphoto)
हेल्थलाइन के अनुसार, बर्थमार्क्स एक सामान्य प्रकार का रंग में बदलाव (discoloration) है, जो जन्म के समय आपकी त्वचा पर दिखाई देता है. ये विभिन्न आकृतियों, रंगों और आकारों के हो सकते हैं.
फिट ने जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ बनानी चौधरी से बात की.
80 परसेंट मामलों में, बर्थमार्क्स से कोई नुकसान नहीं होता है. इसका रिस्क ज्यादातर इसके प्रकार, स्थान और आकार पर निर्भर करता है.
डॉ बनानी चौधरी
बर्थमार्क की व्यापक रूप से दो कैटेगरी है: वैस्कुलर और पिग्मेंटेड
वैस्कुलर मार्क्स तब दिखाई देते हैं, जब ब्लड वेसल्स एक क्षेत्र में जमा हो जाती हैं या यह अपनी वास्तविक आकार की तुलना में व्यापक होती हैं. सैल्मन पैचेस (त्वचा पर हल्के गुलाबी रंग के धब्बानुमा निशान), मस्से (hemangiomas) और पोर्ट वाइन स्टेन्स (nevus flammeus) इसके उदाहरण हैं.
पिग्मेंटेड निशान उस समय होते हैं, जब शरीर के एक हिस्से में पिगमेंट (वर्णक) सेल्स का एक समूह होता है. तिल या जन्मजात नेवी (भूरा या काले रंग का निशान), कैफे ओ लाइट स्पॉट (हल्के भूरे रंग का) और मंगोलियन ब्लू स्पॉट इसके कुछ प्रकार हैं.
पिगमेंटेड बर्थमार्क्स
मंगोलियन स्पॉट नीले-भूरे धब्बे होते हैं, जो आमतौर पर एक नवजात शिशु के नितंबों पर दिखाई देते हैं.(फोटो: iStockphoto)
NHS तीन प्रकार के पिग्मेंटेड बर्थमार्क्स के बारे में बताता है.
कन्जेनिटल मिलानोसाइटिक नेवीः आमतौर पर इन्हें मोल्स या तिल कहा जाता है. ये गुलाबी से हल्के भूरे या काले रंग और विभिन्न आकारों के भी हो सकते हैं. जबकि इनमें से कई समय के साथ गायब हो सकते हैं. अगर इनका आकार बढ़ता है या रंग गहरा होता है, तो इनके स्किन कैंसर के रूप में विकसित होने की आशंका होती है.
Café au lait स्पॉट: ये धब्बे स्किन पर अक्सर अंडाकार आकार के और कॉफी के रंग के होते हैं, जो जन्म के समय या बचपन में विकसित होते हैं. अगर इनकी संख्या बढ़ती है, तो ये न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस का संकेत हो सकते हैं. यह एक जेनेटिक विकार है, जो नर्व सेल्स के बनने और उनके विकास को प्रभावित करता है. आमतौर इनसे कोई खतरा नहीं होता, लेकिन कैंसर होने की एक दुर्लभ आशंका होती है.
मंगोलियन स्पॉट: ये सपाट नीले-भूरे रंग के निशान होते हैं, जो आमतौर पर जन्म के समय पीठ के निचले हिस्से या शिशु के नितंबों पर गहरे रंग में देखे जाते हैं. डॉ चौधरी हमें बताती हैं कि ये नुकसान नहीं करते हैं और आमतौर पर समय के साथ गायब हो जाते हैं.
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वैस्कुलर बर्थमार्क्स
मस्से (Hemangiomas) गुलाबी, लाल या कभी-कभी नीले रंग के निशान के रूप में उभरते हैं. (फोटो: iStockphoto)
तीन प्रकार के वैस्कुलर बर्थमार्क्स के बारे में इस तरह से बताया जा सकता है:
सैल्मन पैच: ये फ्लैट रेड या गुलाबी धब्बे होते हैं जो पलकों, माथे या गर्दन के पिछले हिस्से पर दिखाई दे सकते हैं. ये समय के साथ खत्म हो सकते हैं. आमतौर पर इनके इलाज की जरूरत नहीं होती है.
मस्से: ये त्वचा पर उभरे हुए निशान हैं जो गुलाबी, नीले या चमकीले लाल रंग के हो सकते हैं. ये शरीर पर कहीं भी दिखाई दे सकते हैं. इन्हें 'स्ट्रॉबेरी मार्क्स' के रूप में भी जाना जाता है. ये आमतौर पर शुरू में बढ़ते हैं, लेकिन समय के साथ सिकुड़ते और गायब हो जाते हैं. लेकिन अगर वे बड़े हो रहे हैं, तो वे बच्चे की देखने या सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं. ऐसे में इन्हें डॉक्टर से दिखाने की जरूरत होती है.
डॉ चौधरी कहती हैं,
अगर मस्से का आकार बढ़ता रहे तो आपको इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता हो सकती है. इनमें सूजन हो सकती है, जिसके कारण इनमें से खून निकल सकता है. ऐसे मामले में पीडिट्रीशियन या डर्मोटॉलोजिस्ट से जल्द से जल्द संपर्क करना चाहिए.
कैपिलरी मैलफोर्मेशन (port wine stain): ये सपाट लाल या बैंगनी रंग के निशान होते हैं, जो आकार में अलग-अलग हो सकते हैं. ये शरीर के किसी भी हिस्से पर दिखाई दे सकते हैं - अधिकतर चेहरे, छाती और गर्दन पर. ये आमतौर पर समय के साथ खत्म नहीं होते हैं. बाद में यह अधिक बढ़ सकते हैं. अगर ये व्यक्ति के पलकों पर हैं तो इसका इलाज कराना होगा.
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है, ‘बर्थमार्क्स के मामले में डॉक्टर के पास जाना हमेशा बेहतर विकल्प होता है.’(फोटो: iStockphoto)
जब एक बच्चे के शरीर पर इस तरह के निशान असामान्य रूप से बढ़ते हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि उन्हें डॉक्टर से दिखाने की आवश्यकता होती है.
डॉ चौधरी सुझाव देती हैं, ‘जब मस्सा बढ़ता है और परेशानी पैदा करता है, तो उसके इलाज की आवश्यकता हो सकती है. तब पीडिट्रीशियन के पास जाने और उसके द्वारा बताई गई कुछ दवा खाने की आवश्यकता होती है. अगर ये दवा से ठीक नहीं होता है तो हम लेजर ट्रीटमेंट ऑफर करते हैं.'
बर्थमार्क्स के मामले में डॉक्टर के पास जाना हमेशा एक बेहतर विकल्प होता है. लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि कब एक तिल असामान्य रूप से बड़ा हो जाता है और मेलेनोमा का संकेत बन जाता है. डॉक्टर आपको एक सामान्य दाग और एक संभावित बड़ी समस्या के बीच अंतर करने में मदद कर सकते हैं. जब इन निशानों का जगह हवा जाने के रास्ते, मुंह, नाक या आंखों के पास हो, तो एक्सपर्ट की राय लें.
डॉ चौधरी
क्या बर्थमार्क्स का कोई विशेष कारण है? वह कहती हैं वास्तव में नहीं.
अगर आपके परिवार में किसी को जन्मजात निशान हैं, तो आपको इसके होने का अधिक आशंका हो सकती है. कुछ निशान जीन म्यूटेशन के कारण भी होते हैं. इन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं है.
लेजर्स की बात करते हुए, वह हमें बताती हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से हानिरहित है, लेकिन इसमें लगभग 8-12 सेशन लग सकते हैं.
इसलिए, बर्थमार्क्स आमतौर पर गंभीर नहीं होते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा सबसे अच्छा होता है.