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अक्सर ऐसा होता है की जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो आप अपनी सारी बातें डॉक्टर से अच्छी तरह नहीं कह पाते हैं. फिर जब डॉक्टर के केबिन से बाहर निकलते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि हमारे पैसे बर्बाद हो गए.
महंगाई ने दवाओं के दाम और डॉक्टर की फीस इतनी ज्यादा कर दी हैं. वही दिन अच्छे थे जब हमारे घर फैमिली डक्टर आते थे. वो हमारी बातें कितने ध्यान से सुनते थे और हमारे सवालों को भी तसल्ली भरा जवाब देते थे.
हो सकता है कि आपके यहां कभी फैमिली ड़ॉक्टर आते ना हों फिर भी आप आज के डॉक्टरों को कोसते हैं. वो आपको बस पाँच मिनट ही देखते हैं और आपके ढेर सारे सवालों के जवाब आपको नहीं मिल पाते. या जवाब मिलता भी है तो वो आपको संतुष्ट नहीं कर पाता है.
और यह भी कि जब क्लिनिक में ढेर सारे मरीज भर जाते हैं तो डॉक्टर के ऊपर भी उन्हें जल्दी देखने का प्रेशर बढ़ जाता है. और आप को यह भी सोचना होगा कि समय बहुत क़ीमती होता है. लेकिन आप चाहें तो कम समय में भी डॉक्टर से फ़ायदा उठा सकते हैं. उसके लिए इन तरीक़ों को अपनाना होगा.
डॉक्टर को अपनी तकलीफ बतानी हो तो दिमाग में ही सही उसकी लिस्ट बना ले. अपनी तकलीफ की सही-सही जानकारी देकर ही आप खुद की मदद कर सकते हैं. इससे डॉक्टर को आपकी बीमारी समझने में आसानी होगी.
आपने पहले जिस भी डॉक्टर को दिखाया हो, या कोई मेडिकल टेस्ट कराया हो, उन सारे कागज़ात को लेकर जाएं. वो आपको भले ही गैर-जरुरी लगें फिर भी उन्हें अपने पास रखें. हो सके तो उन्हें तारीख के हिसाब से सजा कर ले जाएं. अगर आप को किसी खास चीज से एलर्जी हो या आपके परिवार में किसी को सेहत से संबंधित कोई गंभीर समस्या हो तो उसकी भी जानकारी लिख लें.
लिखना हमेशा फायदेमंद होता है इससे आपका वक्त बचता है. आप दवाओं का नाम भी नहीं भूलते हैं और सबसे अहम बात यह कि आप जब लिखा हुआ पर्चा डॉक्टर के सामने रखेंगे तो डॉक्टर भी नजरअंदाज नही कर पाएंगे.
अगर आप स्मोकिंग करते हैं, शराब पीते हैं या कोई नया व्यायाम शुरु किया है, तो वो अपने डॉक्टर को बताएं. यहां तक कि अगर कोई तनाव है या फिर हाल-फिलहाल ही जिन्दगी मे कोई नया बदलाव आया हो तो वह भी बताएं क्योंकि यह सब आपके इलाज में मदद करेंगे.
यह सच है कि डॉक्टर की बात हमें समझ में नहीं आती, लेकीन हमेशा उनसे आम भाषा में समझाने के लिए कहें.
आपको क्या बिमारी है? दवाएं कैसे लेनी है?
अगर ये बार बार पूछना पड़े तो इसमे कोई बुराई नहीं है.
डॉक्टर से यह जरूर पता करें कि टेस्ट करवाना कितना जरुरी है? या फिर कोई दूसरा विकल्प है? यह जरूर पूछें कि आपको एंटीबायोटिक्स या स्टेरॉयड दिए गएं हैं या नहीं.
बेहतर ये होगा की तेज एंटीबायोटिक्स की मदद से बीमारी को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश ना करें.
अगर आप हर बीमारी का फौरन इलाज चाहते हैं तो थोड़ा सबर करें. वो डॉक्टर हैं कोई जादू की छड़ी नहीं कि आप दिखाते ही ठीक हो जाएंगे.
डॉक्टर के पास फॉलोअप के लिए जरुर जाएं और अपनी रिपोर्ट दिखाएं और उसे ठीक से समझें.
अगर डॉक्टर ने एंटीबायोटिक्स दी है तो समय से पहले खाना बंद ना करें. आपकी तबीयत बेहतर लगने लगे तो भी. अगर डॉक्टर ने आपको स्टेरॉयड लिखा है तो उसे निर्धारित समय के हिसाब से लें और खुद से अपना इलाज करने से बचें.
अगर आपको बीमारी या दवाओं के बारे में कोई भी संदेह है तो अपने डॉक्टर के ऑफिस में फोन करें. ज्यादातर डॉक्टर आमतौर पर काम के दौरान बहुत व्यस्त होते हैं लेकिन गंभीर केस को हमेशा उन तक पहुंचाया जाता है.
और अगर जरूरत महसूस हो तो डॉक्टर को एक मैसेज भेजें. मेरे ज्यादातर दोस्त अक्सर फोन नजरअंदाज कर देते हैं पर ईमेल या मैसेज का जवाब जरुर देंते हैं.
शिकायत का हल निकालने का कोई ना कोई तरीका हमेशा होता है. अगर आप अपने डॉक्टर से सच में निराश हैं तो लिखित शिकायत करें . अधिकतर अस्पताल मरीज की लिखित शिकायत को बहुत गंभीरता के साथ लेते हैं. उपभोक्ता फोरम भी आपकी शिकायत पर ध्यान देते हैं.
अगर आप सच में इसका समाधान चाहते हैं ताे अपनी शिकायत फेसबुक पर लिखने के बजाए फीडबैक फॉर्म में लिखें.
यह सच है की मरीज और डॉक्टर के बीच बेहतर रिश्ते के लिए यकीन और बात-चीत आवश्यक है. इसलिए जब आप बेहतर महसूस करने लगें तो अपने डॉक्टर को एक बार शुक्रिया जरूर कहें.
(डॉ शिबल भारती फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुड़गांव में ओप्थामोलॉजी सर्विसेज के वरिष्ठ सलाहकार हैं.)
Published: 08 May 2018,01:10 PM IST