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प्रेग्नेंसी नए तजुर्बों को सीखने का समय है. एक नए जीवन को जन्म देना सुकुन देने वाला मौका है, लेकिन इस दौरान महिला शारीरिकऔर भावनात्मक बदलावों से भी गुजरती है, जो काफी मुश्किल हो सकता है.
प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी गर्भावस्था के बारे में और जानने के लिए प्रसव-पूर्व कक्षाओं में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. प्रसव कंसलटेंट, स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला स्वास्थ्य कंसल्टेंट की निगरानी में इन क्लासेज में माता-पिता को उनके बच्चे के भले के बारे में हर तरह के शक-सुबहे दूर करने का मौका मिलता है.
यहां कुछ तरीके बताए जा रहे हैं, जिनकी मदद से प्रसव-पूर्व क्लासेज में शामिल हो कर आप भी इनका फायदा उठा सकते हैं, ये गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने में मददगार होंगे.
गर्भावस्था के दौरान सभी किस्म के माध्यमों से सलाह लेना स्वाभाविक है- आपका परिवार, दोस्त या यहां तक कि इंटरनेट भी! आखिरकार एक बच्चा पालने के लिए पूरे गांव की जरूरत पड़ती है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि आपको जो कुछ भी बताया जाता है, वह सब भरोसे के काबिल है.
कंसल्टेंट की क्लासेज में शामिल होकर आप सीधे अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों से प्रामाणिक जानकारी हासिल करती हैं. क्लास में उन शारीरिक बदलावों के बारे में बताया जाता है, जिनसे महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में गुजरना पड़ता है. ये क्लासेज आपके पूरे गर्भावस्था के अनुभव पर एक समग्र दृष्टि देती हैं और इनकी मदद से रोजमर्रा की डाइट, फिटनेस, लाइफस्टाइल जैसी बुनियादी बातें सीखी जा सकती हैं.
गलत धारणाओं और मिथकों को सही मानने की बजाए कपल्स को इस वर्कशॉप में शामिल होने और अपने संदेहों को दूर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
गर्भावस्था के दौरान और प्रसव बाद का अवसाद ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें अक्सर अधिकांश भारतीय परिवारों में खारिज कर दिया जाता है. एक बार जब आप बच्चे के जन्म के चमत्कारिक और उल्लास देने वाला काम पूरा हो जता है, तो थकावट हावी हो जाती है. शारीरिक या भावनात्मक परिवर्तन कुछ मांओं के लिए घातक हो सकते हैं और कई मांओं के लिए असहनीय हो सकते हैं.
प्रसव-पूर्व क्लासेज में शामिल होने वाली महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कंसल्टेंट और महिला स्वास्थ्य सलाहकारों के साथ एक रिश्ता बना लेती हैं. अक्सर डॉक्टर खुद ही उन महिलाओं में चेतावनी संकेत या व्यवहार में बदलाव को पहचान लेते हैं, जिनके साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया है. कई बार, वे उनसे मिलते हैं और अगर जरूरी हो, तो उन्हें अस्पताल में मनोचिकित्सक के पास भेजते हैं.
कपल्स जब वर्कशॉप के दौरान मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा लोगों से बात करते हैं, तो उनको समझ में आता है कि वह जो कर रहे हैं, वो सामान्य है. वह समझते हैं कि उनके साथ कुछ भी अलग नहीं हो रहा है और अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए प्रेरित होते हैं.
यह महत्वपूर्ण है कि महिलाएं खुद पर भरोसा हासिल करें और अपने शरीर की ताकत, प्राकृतिक क्षमताओं पर यकीन करें. इन क्लासेज में भावी मांओं को यह समझने में मदद मिलती है कि उनके शरीर को जन्म देने और स्तनपान कराने के लिए डिजाइन किया गया है.
प्रसव-पूर्व कक्षाएं प्रोफेशनल सपोर्ट देती हैं, जिससे किसी भी तरह की चिंता या आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलती है और जिससे प्रसव की फिक्र काफी हद तक कम हो जाती है.
ऐसा कहा जाता है कि कोई भी दो गर्भावस्था एक समान नहीं है, फिर भी गर्भावस्था के दौर के बारे में दूसरों के सबक को सुनने से काफी सहारा मिल सकता है. जब प्रसव प्रक्रिया की बात आती है, तो हर किसी के मन में कुछ डर होता है. इसलिए यह सब कुछ समझने में मदद करता है और पहले से बेहतर तैयारी होती है. प्रसव और प्रसव-पूर्व क्लास में प्रसव के विभिन्न चरणों को शामिल किया जाता है.
इन क्लासेज में, दूसरी बार मां बन रही महिलाओं को नई मांओं के साथ अपनी दास्तान बताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
दर्द का सामना करने में मदद और सांस की तकनीकों पर उपयोगी टिप्स हासिल करने के लिए महिलाओं को अपनी तीसरी तिमाही में इन क्लासेज में शामिल होना चाहिए. प्रसव के दौरान बर्थिंग पार्टनर (साथ मौजूद रहने वाले शख्स) को- जो पति, मां या कोई दोस्त हो सकती है- यह पता होना कि चाहिए कि वो मां बनने जा रही महिला की मालिश और एक्सरसाइज के माध्यम से कैसे मदद कर सकते हैं.
एक बर्थिंग पार्टनर प्रसूता को सुगम प्रसव के लिए जरूरी आत्मविश्वास के साथ-साथ शारीरिक और भावनात्मक समर्थन देता है. प्रसव के दौरान अपनी भूमिका को लेकर पति अक्सर अनिश्चय की हालत में होते हैं. प्रसव-पूर्व क्लासेज में पतियों को बताया जाता है कि वे अपने पार्टनर का कैसे साथ दें. उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि मां सहज रहे. प्रसव के दौरान उसे हाइड्रेटेड और शारीरिक रूप से सक्रिय रखने जैसे आसान काम सिखाए जाते हैं और प्यार भरा साथ देना स्वस्थ प्रसव की दिशा में मददगार होता है!
नवजात बच्चे की देखभाल करना नए माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण लग सकता है. अंतिम प्रसव-पूर्व कक्षाएं नए माता-पिता के लिए बच्चे की देखभाल और स्तनपान कराने का आधार तैयार करती हैं.
इन प्रसव-पूर्व कक्षाओं में, माताओं को खुद की देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
इन क्लासेज में भावी मांओं को खुद को किसी और की आंख से देखने की बजाए, वैसा सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जैसा उन्हें दिखना चाहिए. वर्कशॉप में पति अपनी पार्टनर का साथ देने और जिम्मेदारियों को साझा करने की अहमियत को समझते हैं.
(डॉ. रिंकू सेनगुप्ता सीताराम भारती इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च में अब्स्टेट्रिक्स और गायनेक्लॉजी की कंसल्टेंट हैं.)
Published: 21 Dec 2018,05:07 PM IST