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क्या आपको कुछ तरह की आवाजों से चिढ़ होती है? क्या कुछ ध्वनियां आपको गुस्सा दिलाती हैं? अगर ऐसा है, तो आप मिसोफोनिया का शिकार हो सकते हैं.
मुंबई में रहने वाले 31 साल के मार्केटिंग प्रोफेशनल शेख हुसैन को हाई फ्रिक्वेंसी वाली ध्वनि जैसे गिटार की आवाज या नायलॉन की रगड़ से निकलने वाली आवाज से ऐसा लगता है जैसे उनका दिमाग काम करना बंद कर देगा. हुसैन ने बताया,
मेटल से निकलने वाली आवाज सुनकर क्या आप गुस्से से पागल हो जाते हैं? क्या चबाने की आवाज सुनकर आपको ऐसा लगता है कि आप उस आवाज निकालने वाले व्यक्ति को मुक्का मार दें या उसकी जान ले लें. क्या आपके आसपास की ऐसी कोई भी आवाज, जिससे आपका ध्यान बंटता है, आपको परेशान करती या गुस्सा दिलाती है?
कई मशहूर हस्तियां जैसे फ्रेंज काफका, मर्सेल प्रूस्ट, एंटन चेखव, एक्टर मेलानी लिंस्की और सिंगर व गीतकार केली ओसबोर्न मिसोफोनिया का शिकार रह चुके हैं.
मिसोफोनिया एक तंत्रिका मनोविकार है, जो ध्वनि के कारण गुस्से और घबराहट के परिणामस्वरूप होता है. यह एक असमान प्रतिक्रिया के रूप में खुद को प्रकट करता है.
बहुत सारे लोग पसंद नहीं आने वाली या अप्रिय ध्वनियों से नकारात्मक महसूस करते हैं. भले ही यह हमारे आसपास की सामान्य ध्वनियां हों. जैसे किसी के सांस लेने, खांसने या जम्हाई लेने की ध्वनि. इस तरह की ध्वनियों से मिसोफोनिया ग्रस्त लोगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है.
भारतीयों में यह स्थिति बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है. देश में प्रतिवर्ष करीब 10 लाख से भी कम मामले सामने आते है. दिल्ली के प्रमुख मनोचिकित्सक डॉ. शेख अब्दुल बसीर कहते हैं,
'मैंने अपने 26 साल की प्रैक्टिस के दौरान मिसोफोनिया के सिर्फ एक या दो मामले ही देखे हैं.'
डॉ. बशीर बताते हैं,
उदाहरण के लिए हाइपरएक्यूसिस एक सुनने संबंधी विकार है. इसमें निश्चित फ्रिक्वेंसी वाली ध्वनि पर व्यक्ति की संवेदनशीलता बढ़ जाती है. इसी प्रकार अन्य व्यक्ति किसी तरह की आवाज या ध्वनि सुनाई देने की शिकायत करते हैं या उन्हें ऐसी आवाज सुनाई देती, जो वास्तव में होती ही नहीं है.
मिसोफोनिया ग्रस्त व्यक्ति अप्रिय लगने वाली ध्वनि या आवाज के प्रति उग्र प्रतिक्रिया जाहिर करेगा या फिर उस तरह की आवाजों से बचने की पूरी कोशिश करेगा.
डॉ. बसीर कहते हैं कि मिसोफोनिया समेत अन्य न्यूरो-मनोवैज्ञानिक विकारों में लाइफस्टाइल संबंधी आदतें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं. सोने के समय में सुधार, तनाव के स्तर में कमी, रोजाना एक्सरसाइज और पोषक आहार की आदत शरीर को शांत और मिसोफोनिया से प्रभावित व्यक्ति की स्थिति में सुधार ला सकती है.
इस तरह के विकारों की चिकित्सा में मस्तिष्क को ऐसे प्रशिक्षित किया जाता है कि वो उग्र रूप से प्रतिक्रिया न जाहिर करे. इसकी कई विधियां मौजूद हैं. इसके अलावा अप्रिय ध्वनि या आवाज के प्रभाव को खत्म करने के लिए नॉइजबॉक्स की मदद से बैकग्राउंड में न्यूट्रल आवाज निकालना इलाज की एक अन्य प्रक्रिया हो सकती है.
Published: 17 Jul 2018,04:40 PM IST