Members Only
lock close icon

बिहार में इस बीमारी से गई 23 बच्चों की जान

बरसात से पहले हर साल बिहार में कहर बरपाती है ये बीमारी.

आईएएनएस
फिट
Updated:
इस साल 10 जून तक 23 बच्चों की मौत
i
इस साल 10 जून तक 23 बच्चों की मौत
(फोटो: ANI)

advertisement

बिहार में उमस भरी गर्मी के बीच मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में बच्चों पर कहर बनकर टूटने वाली बीमारी 'चमकी बुखार' से पीड़ित बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है.

मौसम की तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण संदिग्ध एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) नामक बीमारी से पिछले करीब एक हफ्ते में 23 बच्चों की मौत हो चुकी है.

इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बीमारी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस पर नजर बनाए हुए है.

हर साल इस मौसम में मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारी का कहर जारी है. इस बीच पीड़ित बच्चों को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल मातृ सदन (अस्पताल) में भर्ती किया जा रहा है.

एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ सुनील शाही ने सोमवार को आईएएनएस को फोन पर बताया कि एसकेएमसीएच में सोमवार को बुखार से पीड़ित 20 बच्चे पहुंचे, जिन्हें पीसीआईयू में भर्ती कराया गया है. उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में अब तक 72 पीड़ित बच्चों को भर्ती कराया गया है, जिसमें से इलाज के दौरान 19 बच्चों की मौत हो चुकी है.

शुगर और सोडियम की कमी

इनमें से ज्यादातर बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है. एईएस के संदिग्ध मरीजों का इलाज शुरू करने से पहले चिकित्सक उसकी जांच कराते हैं. ब्लड शुगर, सोडियम, पोटेशियम की जांच के बाद ही इलाज शुरू किया जाता है.
डॉ सुनील शाही
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

इधर, केजरीवाल अस्पताल प्रबंधक ने कहा कि एक हफ्ते में यहां चमकी बुखार से पीड़ित 39 बच्चों को भर्ती किया गया, जिसमें से चार बच्चों की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि सात बच्चों का अभी भी इलाज चल रहा है.

एसकेएमसीएच में डॉक्टरों और दूसरे स्टाफ की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है. उमस भरी गर्मी के कारण ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है.

बरसात से पहले हर साल फैलती है ये बीमारी

मुजफ्फरपुर में फैली बीमारी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से हो रही बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर नजर रख रहा है. बरसात से पहले ये बीमारी हर साल बिहार में कहर बरपाती है. इसकी पूरी जांच की जा रही है.

उन्होंने कहा, "लोगों को इस बीमारी को लेकर जागरूक करना होगा. हर साल बच्चे काल की गाल में समा जा रहे हैं. ये चिंता का विषय है."

उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली में बीमारी का प्रभाव दिखता है.

इस साल अब तक एसकेएमसीएच में जो मरीज आ रहे हैं, वे मुजफ्फरपुर और आसपास के हैं.

इधर, स्वास्थ्य विभाग अभी तक मात्र 11 बच्चों की मौत की पुष्टि कर रहा है. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस मौसम में अब तक 11 बच्चों की मौत हुई है, जिसमें अधिकांश बच्चों की मौत हाइपोग्लाइसीमिया के कारण हुई है.

Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Early previews of our Special Projects
Continue

Published: 10 Jun 2019,05:44 PM IST

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT