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अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप ने हाल ही में इंस्टाग्राम के जरिये बताया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का पता चला है, जो अभी जीरो स्टेज पर है. लेखक, टीचर, डायरेक्टर और रेडियो प्रोग्रामर ताहिरा को हुए ब्रेस्ट कैंसर को डक्टल कार्सिनोमा इन सिटू (डीसीआईएस) के रूप में जाना जाता है. उनके दायें स्तन में उच्च स्तर की घातक कोशिकाओं (high grade malignant cell) का पता चला.
ताहिरा ने बताया कि इसे 0 स्टेज कैंसर या प्री-कैंसर स्टेज के नाम से जाना जाता है, इसमें कैंसर कोशिकाएं एक निश्चित क्षेत्र में बढ़ती हैं.
डक्टल कार्सिनोमा इन सिटू (DCIS) नॉन-इन्वेसिव ब्रेस्ट कैंसर है. डक्टल का मतलब होता है, ऐसा कैंसर जो दूध की नलिकाओं (ducts) में शुरू होता है. कार्सिनोमा का मतलब ऐसे कैंसर से है, जो त्वचा या किसी आंतरिक अंग को कवर करने वाले ऊतकों में शुरू होता है (इसमें स्तन के ऊतक भी शामिल हैं). सिटू का मतलब होता है, अपने मूल जगह पर.
Breastcancer.org के मुताबिक DCIS जानलेवा नहीं होता, लेकिन बाद में ये तेजी से फैलने वाले ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा जरूर बढ़ा देता है.
वहीं Cancer.org के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि इसमें कोशिकाएं पास के स्तन ऊतक (tissue) में नहीं फैल पाती हैं.
नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ मोहित अग्रवाल डीसीआईएस को कुछ इस तरह से परिभाषित करते हैं:
मैक्स सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रमोद कुमार जुल्का कहते हैं कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह स्तन में बढ़ने वाले ट्यूमर का रूप ले सकता है.
मायो क्लिनिक के अनुसार डीसीआईएस के बहुत ज्यादा लक्षण नहीं है, लेकिन इसमें कभी-कभी स्तन में गांठ या निपल से खून निकलना हो सकता है.
डॉ. जुल्का कहते हैं कि डीसीआईएस में अधिकतर कोई लक्षण या संकेत नहीं दिखते हैं, लेकिन कभी-कभी स्तनों के आकार में बदलाव हो सकता है.
डॉ. अग्रवाल इससे सहमत होते हुए कहते हैं:
एक मैमोग्राम के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है.
डीसीआईएस के इलाज के मुख्य रूप से दो तरीके हैं.
ब्रेस्ट कन्जर्विंग सर्जरी (बीसीएस)- इस प्रक्रिया में ट्यूमर और आसपास के कुछ ऊतकों को निकाला जाता है. बाकि स्तन को छोड़ दिया जाता है. बीसीएस में प्रायः रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है.
मास्टकटोमी (स्तन को हटाना)- अगर डीसीआईएस स्तन के बड़े हिस्से में फैल गया है, तो इसे पूरी तरह से हटा दिया जाता है. स्तन हटाने की यह सर्जरी मास्टकटोमी कहलाती है. अगर डीसीआईएस कई स्थानों में फैल गया हो और बीसीएस से नहीं हटाया जा सकता हो, तो मास्टकटोमी की जाती है. इसमें प्रायः स्तन रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत पड़ती है.
नियमित तौर पर अपनी जांच कराएं. डॉक्टर जुल्का 20 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए नियमित रूप से खुद से जांच की बात कहते हैं. 30 साल की उम्र के बाद से डॉक्टर के द्वारा जांच कराई जानी चाहिए. साथ ही अगर परिवार में किसी को ये पहले हो चुका है, तो 40 की उम्र के बाद अल्ट्रासाउंड/मैमोग्राम कराना चाहिए.
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि मैमोग्राम के जरिये 80 प्रतिशत मामलों का पता लग जाता है.
Published: 03 Oct 2018,01:51 PM IST