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डाउन सिंड्रोम केे बारे में ये बातें आपको पता होनी चाहिए

भारत में 1000 में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता है.

निकिता मिश्रा
फिट
Updated:
डाउन सिंड्रोम (डीएस) एक जेनेटिक सिंड्रोम है 
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डाउन सिंड्रोम (डीएस) एक जेनेटिक सिंड्रोम है 
(फोटो: iStockphoto)   

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21 मार्च को वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम दिवस मनाया जाता है. यह डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरूकता के लिए बहुत अहम दिन है. आखिर ये ‘डाउन सिंड्रोम है क्या ? क्या हम इस बारे में जागरूक हैं? डाउन सिंड्रोम होने का क्या मतलब है और डाउन सिंड्रोम वाले लोग हमारे जीवन और समुदायों में कैसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? आइए जानते हैं इन सभी सवालों से जुड़े जवाब.

मेरी एक दोस्त है जिसकी दुनिया तब उजड़ गई जब वह लगभग 20 हफ्ते की प्रेगनेंट थी. जब डॉक्टर ने बताया कि उसका अजन्मा बच्चा डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है. उसके पैरों के नीचे से जमीन निकल गई. वह बिल्कुल चुपचाप खड़ी रही. मां बनने की जो खुशियां, आकांक्षाएं और सपने उसने देखे थे वह सब एक रिपोर्ट के बाद ही खत्म हो गए. वो भले ही बहुत परेशान थी लेकिन अबॉर्शन उसके विकल्प में कभी नहीं था.

डाउन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक बच्चा 21 वीं क्रोमोसोम्स की एक एक्स्ट्रा कॉपी के साथ पैदा होता है (प्रत्येक क्रोमोसोम्स की दो कॉपी होती हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम की स्थिति में यह तीन होती है. इसलिए यह दिन 21/03 को मनाया जाता है). यह अतिरिक्त जेनेटिक मैटिरियल मानसिक और शारीरिक विकास को धीमा कर देता है. लेकिन इससे पैरेंट्स इससे निपटना सीख सकते हैं.

मेरी दोस्त ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा, ‘पहला सवाल जो मेरे दिमाग में चल रहा था, वह ये था कि मैं ही क्यों! लेकिन अब मैं गायत्री का अपने जीवन में होने का भगवान का जितना शुक्रिया अदा करूं कम है.’

भारत में 1000 में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता हैं. इसके बावजूद इस बारे में बहुत कम जागरूकता है. चार लाख से अधिक भारतीय इस डिस्ऑर्डर के साथ जीवन बीता रहे हैं

वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे के मौके पर, कुछ समान्य रूप से पूछे जाने वाले सवालों के जवाब जानते हैं.

1.डाउन सिंड्रोम के क्या कारण हैं?

डाउन सिंड्रोम क्रोमोसोम्स संख्या 21 के अतिरिक्त सेट के कारण होता है. शरीर में प्रत्येक कोशिका में 23 सेट क्रोमोसोम्स होते हैं, जो प्रत्येक माता-पिता में से एक होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम तब होता है जब एक माता-पिता अतिरिक्त जेनेटिक मैटिरियल का योगदान करते हैं. अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं को डाउन बेबी होने की आशंका अधिक होती है.

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(फोटो: FIT)  यदि आपके पास डाउनसिंड्रोम वाला बच्चा है और दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आप अपने डॉक्टर से जेनेटिक काउंसलिंग के बारे में बात कर सकते हैं. 

2. आपका बच्चा अकेला नहीं है

डाउन सिंड्रोम दुनिया भर के बच्चों में सबसे आम क्रोमोसोमल जेनेटिक एबनॉर्मेलिटी है. यदि 35 वर्ष की आयु के बाद महिला प्रेगनेंट होती है तो बच्चे में डाउन सिंड्रोम का खतरा तेजी से बढ़ जाता है.

डाउन सिंड्रोम दुनिया भर के बच्चों में सबसे आम क्रोमोसोमल जेनेटिक एबनॉर्मेलिटी है. (फोटो: FIT)   
डाउन सिंड्रोम वाले कई बच्चे दिल, आंत, कान या सांस लेने की समस्याओं के साथ पैदा होते हैं.

शहरी भारत के लगभग सभी अच्छे क्लीनिक में डाउन-स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध होता हैं. ये टेस्ट प्रेगनेंसी के 13वें या 14वें सप्ताह में किया जाता है. यह एक नॉन-इनवेसिव स्क्रीनिंग टेस्ट है जो यह बताता है कि एक भ्रूण को डाउन सिंड्रोम की आशंका हो सकती है. हाई रिस्क वाले ग्रुप के लोगों के लिए, गर्भाशय में एक सुई के जरिये डाउन सिंड्रोम का पता लगाने के लिए टेस्ट होता है.

3. डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं

डाउन सिंड्रोम के साथ लोग अतीत की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहे हैं. यह उससे जुड़े इलाज के उपलब्ध होने के कारण संभव हुआ है. 1983 में औसत जीवन प्रत्याशा 25 साल थी, जो आज 60 साल है.

4. आगे की राह मुश्किल होगी

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे के माता-पिता लंबे समय तक डरे, भ्रमित, चिंतित और दुखी रह सकते हैं. (फोटो: FIT)   

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों की देखभाल करने वाले परिवारों के सामने कई चुनौतियां हैं. इनमें से एक बात की अधिक आशंका है कि उनके बच्चों को दिल की खराबी के लिए सर्जरी करानी पड़े. शुरुआत में सांस की समस्या, अल्जाइमर या कुछ प्रकार के कैंसर का सामना करना पड़ सकता है.

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे के नए माता-पिता लंबे समय तक डर, भ्रमित, चिंतित और दुखी रह सकते हैं. हालांकि, प्रॉपर सपोर्ट और एडवांस मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, डाउन से ग्रस्त बच्चों लाइफ क्वालिटी बेहतर हुई है.

5. एक पैरेंट्स के रूप में, आप फिर से खुश होंगे

भारत में चार लाख से अधिक लोग डाउन सिंड्रोम के साथ जिंदगी जी रहे हैं. (फोटो: FIT)   

भले ही डाउन सिंड्रोम के इलाज के बाद ऐसा महसूस हो कि परेशानी खत्म हो गई है, इसके बावजूद हर दिन चुनौतियों से भरा है. अच्छी खबर यह है कि डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति के साथ अधिकांश परिवार खुश हैं और अधिक पॉजिटिव हैं जितना कि वह पहले इनके बिना थे.

मेरी दोस्त जिसकी बेटी अब 3 साल की है, उसने अपने बच्चे की तस्वीरों को देखा और उसमें मिले जुले इमोशन थे. वह कहती है ‘मैं चाहती हूं कि दूसरे लोग गायत्री को पहले देखें, न कि उसकी डाउन सिंड्रोम की बीमारी को.’

मैं उसकी बेटी से मिल चुकी हूं वो सबसे जिंदादिल प्री-स्कूलर है. वह खुद से पूरी तरह संतुष्ट है और खुद से बहुत प्यार करती है. वो अपनी रेगुलर लाइफ में बहुत खुश हैं.

वह वहीं सब चीजें करते हैं जो किसी भी 3 साल के बच्चे के माता पिता करते हैं जैसे समुद्र तट के किनारे छुट्टियां बिताना, बगीचे की सैर करना आदि.

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Published: 21 Mar 2019,12:38 PM IST

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