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आवारा कुत्तों के मामले में SC ने फैसला सुरक्षित रखा, राज्यों पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने राज्यों और केंद्र सरकार से लिखित दलीलें एक सप्ताह के भीतर मांगी हैं.

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<div class="paragraphs"><p>सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों से संबंधित याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.</p></div>
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सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों से संबंधित याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

(Photo: Aroop Mishra/The Quint)

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सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों से संबंधित याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया. कोर्ट ने राज्यों और केंद्र सरकार से लिखित दलीलें एक सप्ताह के भीतर मांगी हैं. सुनवाई के दौरान राज्यों की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों और उठाए गए कदमों पर कोर्ट ने असंतोष जताया.

Live Law के अनुसार, कोर्ट ने पाया कि कई राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामे अस्पष्ट थे और कुत्तों के काटने की घटनाओं के आंकड़े नहीं दिए गए थे. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा करे, ताकि अधिक से अधिक नसबंदी केंद्रों को मान्यता मिल सके.

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी कहा कि संस्थागत क्षेत्रों, जैसे स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशनों में आवारा कुत्तों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, इन कुत्तों को उचित टीकाकरण और नसबंदी के बाद ही आश्रय गृहों में भेजा जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन कुत्तों को दोबारा उन्हीं स्थानों पर नहीं छोड़ा जाए.

Bar and Bench ने बताया, देशभर में केवल 76 मान्यता प्राप्त नसबंदी केंद्र हैं, जबकि राज्यों के अनुसार 883 केंद्र संचालित हो रहे हैं. कोर्ट ने AWBI से पूछा कि जिन केंद्रों को मान्यता नहीं मिली, वहां क्या हो रहा है. कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि कई जगह नसबंदी के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते और फंड का दुरुपयोग हो सकता है.

Hindustan Times ने एक लेख में कहा, कोर्ट ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे अपनी लिखित दलीलें एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें. सुनवाई में पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों के वकीलों की दलीलें सुनी गईं.

The Hindu के एक लेख में उल्लेख है, भारत में एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का सही और व्यापक क्रियान्वयन नहीं हुआ है. कुछ राज्यों में जैसे लखनऊ, सिक्किम और गोवा में 70% तक नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों के काटने की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन देशभर में यह प्रयास पर्याप्त नहीं हैं.

Hindustan Times ने बताया, कोर्ट ने कई राज्यों की कार्यप्रणाली को 'आंखों में धूल झोंकना' करार दिया. असम में 2024 में 1.66 लाख और जनवरी 2025 में 20,900 कुत्ते काटने की घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि राज्य में केवल एक ही कार्यशील डॉग सेंटर है. कोर्ट ने कहा कि अधिकांश राज्यों ने बुनियादी आंकड़े तक नहीं दिए.

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, झारखंड द्वारा दो महीने में 1.6 लाख कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया, जिसे कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया. बिहार में 34 ABC केंद्र हैं, लेकिन 6 लाख से अधिक कुत्तों की तुलना में केवल 20,648 की नसबंदी हुई है, जो नाकाफी है.

जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी कि अस्पष्ट हलफनामे देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि संस्थागत क्षेत्रों में बाड़बंदी और कुत्तों की पहचान के लिए सर्वेक्षण की जानकारी भी हलफनामों में नहीं दी गई.

Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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