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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ अपनी याचिका पर दलील दी. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे राज्य के लाखों नागरिकों के मताधिकार पर संकट आ गया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की.
Live Law के अनुसार, ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि SIR प्रक्रिया नाम जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि नाम हटाने के लिए चलाई जा रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शादी के बाद महिलाओं के उपनाम बदलने या घर बदलने पर उनके नाम सूची से हटा दिए जाते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 58 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं और कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है.
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कोर्ट में सवाल उठाया कि केवल बंगाल में ही SIR क्यों लागू की गई, असम या अन्य राज्यों में क्यों नहीं. उन्होंने कहा कि त्योहार और फसल के मौसम में नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि 100 से अधिक BLO अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है और कई अस्पताल में भर्ती हैं.
Hindustan Times ने बताया, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के लोगों को "बुलडोज़" करने की कोशिश कर रहा है और माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति भाजपा शासित राज्यों से की गई है. उन्होंने SIR के तहत जारी सभी आदेशों को रद्द करने की मांग की और कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं.
Deccan Herald ने एक लेख में उल्लेख है, ममता बनर्जी ने कोर्ट में यह भी कहा कि ERO अधिकारियों के अधिकार छीन लिए गए हैं और 8,300 माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जो बिना उचित सत्यापन के नाम हटा रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गरीब और महिला मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित किया जा रहा है.
“मैं बंधुआ मजदूर हूं, मैं किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हूं.”
Bar and Bench ने बताया, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को "व्हाट्सएप कमीशन" कहा और आरोप लगाया कि आयोग अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से निर्देश जारी कर रहा है. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि SIR के तहत नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए, विशेषकर "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" श्रेणी के तहत.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि नाम में असंगति के मामलों में नोटिस सावधानीपूर्वक भेजे जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्दोष नागरिक मतदाता सूची से बाहर न हों.
मध्य में जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, ममता बनर्जी ने कोर्ट में भावुक अपील करते हुए कहा कि "न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है" और बंगाल को चुनाव से ठीक पहले निशाना बनाया जा रहा है.
इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" श्रेणी की सूची ऑनलाइन प्रकाशित नहीं की गई, जिससे प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल रहा.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.