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भारत और यूरोपीय संघने 27 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा और गतिशीलता के क्षेत्र में नई साझेदारी स्थापित हुई. इस समझौते के तहत 96.6% व्यापारिक वस्तुओं पर शुल्क में कटौती या समाप्ति होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी. यह समझौता 2 अरब लोगों के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण करता है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसर खोलता है.
The Indian Express के अनुसार, इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ अगले सात वर्षों में 99.5% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करेगा, जिससे भारतीय समुद्री उत्पाद, चमड़ा, रसायन, रबर, धातु और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों को शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि के लिए नया खाका है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा और कहा, "हमने दो अरब लोगों के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "यह समझौता वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई प्रतिनिधित्व करता है."
The Guardian के एक लेख में उल्लेख है, यह समझौता लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद हुआ है और इससे यूरोपीय कारों, वाइन, मशीनरी, रसायन, इलेक्ट्रिकल उपकरण, और स्टील पर भारतीय शुल्क में भारी कटौती होगी. बदले में, भारतीय वस्त्र, रत्न, औषधि और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी.
The Guardian के अनुसार अब इसे सदस्य देशों और यूरोपीय संसद से अनुमोदन मिलना बाकी है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा, "यह समझौता वैश्विक व्यवस्था के पुनर्गठन के समय दुनिया को स्पष्ट संदेश देता है."
“हमने दो अरब लोगों के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा. यह केवल शुरुआत है. हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे.” – उर्सुला वॉन डेर लेयेन
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, राज्यवार लाभों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को निर्यात में वृद्धि, रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों के लिए नए अवसर मिलेंगे. विशेष रूप से वस्त्र, चमड़ा, कृषि, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी.
इस लेख में उल्लेख है. कि इस समझौते के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, और प्रतिभा गतिशीलता के लिए व्यापक ढांचा भी स्थापित किया गया है. इससे भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों को यूरोप में नए अवसर मिलेंगे और दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक सहयोग और मजबूत होगा.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.