Economic Survey 2025-26 में RTI अधिनियम की पुनः समीक्षा की सिफारिश

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने आरटीआई अधिनियम की पुनः समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है.

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<div class="paragraphs"><p>RTI एक्ट में क्या संशोधन हुए? </p></div>
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RTI एक्ट में क्या संशोधन हुए?

(फोटो: द क्विंट)

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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में संसद में प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की पुनः समीक्षा की आवश्यकता बताई गई है. सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि नीति निर्माण की विचार-विमर्श प्रक्रिया, ड्राफ्ट टिप्पणियों और कार्यकारी नोट्स को अंतिम निर्णय बनने तक सार्वजनिक करने से छूट दी जानी चाहिए. साथ ही, मंत्रीस्तरीय वीटो का विकल्प भी सुझाया गया है, जो संसदीय निगरानी के अधीन हो.

The Indian Express के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण ने आरटीआई अधिनियम को लोकतांत्रिक सुधार और जवाबदेही का सशक्त उपकरण माना है, लेकिन यह भी कहा है कि अधिनियम के दायरे में आने वाली सूचनाओं की अति-प्रसार से शासन में बाधा आ सकती है. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य केवल जिज्ञासा शांत करना या बाहरी हस्तक्षेप के माध्यम से शासन का सूक्ष्म प्रबंधन करना नहीं था.

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख है कि आरटीआई अधिनियम में कुछ ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं, जिनमें सेवा अभिलेख, स्थानांतरण और गोपनीय स्टाफ रिपोर्ट्स को आकस्मिक अनुरोधों से बचाया जाए, जिससे सार्वजनिक हित में वास्तविक योगदान सुनिश्चित हो सके. साथ ही, मंत्रीस्तरीय वीटो को सीमित दायरे में लागू करने की बात कही गई है, ताकि शासन में अनावश्यक बाधा न आए.

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे देशों में आंतरिक नियम, अंतर-एजेंसी ज्ञापन और वित्तीय विनियमों को खुलासे से छूट दी जाती है, जबकि भारत में ऐसे प्रावधान अपेक्षाकृत कम हैं. भारतीय कानून के तहत ड्राफ्ट नोट्स, आंतरिक पत्राचार और व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी सार्वजनिक डोमेन में आ जाते हैं, जिससे अधिकारियों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है.

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन या दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में नीति निर्माण की प्रक्रिया और ड्राफ्ट दस्तावेजों को आमतौर पर खुलासे से छूट दी जाती है, जबकि भारत में केवल कैबिनेट पेपर्स को अस्थायी रूप से संरक्षित किया जाता है. जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लिखित, फाइल नोटिंग्स, आंतरिक राय और ड्राफ्ट नोट्स आरटीआई अधिनियम की परिभाषा में सीधे आते हैं, जिससे अधिकारियों को हर विचार के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है.

सर्वेक्षण में यह चिंता भी जताई गई है कि यदि हर ड्राफ्ट या टिप्पणी का खुलासा किया जाएगा, तो अधिकारी अपने विचारों को साझा करने में हिचक सकते हैं और साहसिक सुझावों से बच सकते हैं. सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य गोपनीयता को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारी स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें और अंतिम निर्णय के लिए ही जवाबदेह हों.

“लोकतंत्र सबसे अच्छा तब काम करता है जब अधिकारी स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें और फिर उन निर्णयों के लिए जवाबदेह हों, जिनका वे समर्थन करते हैं, न कि हर अधूरे विचार के लिए.”

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि आरटीआई अधिनियम को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप लाने, विकसित होते सबक शामिल करने और इसे अपनी मूल भावना से जोड़े रखने के लिए पुनः समीक्षा आवश्यक है. इस रिपोर्ट में जिक्र है, कि आरटीआई अधिनियम में संभावित समायोजन से शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही के बीच संतुलन साधा जा सकता है.

सर्वेक्षण में यह भी जोड़ा गया है कि आरटीआई अधिनियम के तहत खुलासे की प्रक्रिया को इस तरह से परिभाषित किया जाए कि वह न तो शासन को अनावश्यक रूप से बाधित करे और न ही पारदर्शिता की मूल भावना से समझौता करे. इस लेख में उल्लेख है.

Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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