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दिल्ली आबकारी नीति मामला: केजरीवाल, सिसोदिया सहित सभी आरोपी CBI केस में बरी

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और CBI की चार्जशीट में कई खामियां थीं.

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<div class="paragraphs"><p>दिल्ली आबकारी नीति केस: अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया सहित सभी आरोपी CBI केस में बरी</p></div>
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दिल्ली आबकारी नीति केस: अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया सहित सभी आरोपी CBI केस में बरी

(फोटो: @AamAadmiParty/ट्विटर)

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दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 27 फरवरी 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 21 लोगों को सीबीआई द्वारा दर्ज आबकारी नीति मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और सीबीआई की चार्जशीट में कई खामियां थीं. यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था.

The Indian Express के अनुसार, दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर यह मामला शुरू हुआ था, जिसमें नीति निर्माण में प्रक्रियागत चूक और वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि नीति के तहत शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और इससे सरकारी खजाने को 580 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ.

Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चार्जशीट में गवाहों के बयान या सबूतों का अभाव है. विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि केजरीवाल को बिना किसी ठोस सामग्री के आरोपी बनाया गया, जो कानून के सिद्धांतों के विपरीत है. अदालत ने सीबीआई जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए.

Bar and Bench ने बताया, अदालत ने स्पष्ट किया कि नीति में किसी प्रकार की आपराधिक साजिश या गलत मंशा नहीं थी. अदालत ने कहा, "प्रॉसिक्यूशन का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया क्योंकि सीबीआई ने केवल अनुमानों के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की." अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा माफी दिए गए आरोपियों के बयानों का उपयोग जांच में खामियों को भरने के लिए किया गया, जो संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है.

“अगर ऐसी प्रक्रिया को अनुमति दी जाती है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा. माफी दिए गए आरोपी के बयान का इस्तेमाल जांच में खामियों को भरने के लिए करना गलत है.”

Hindustan Times ने एक लेख में कहा, अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है. केजरीवाल और सिसोदिया को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अदालत ने जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर मामलों में भी केजरीवाल को बरी कर दिया था.

The Hindu के अनुसार, अदालत के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल अब 1 मार्च को जंतर मंतर पर भाजपा सरकार के खिलाफ नौकरी छिनने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे. आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के लोग भाजपा सरकार के फैसलों से परेशान हैं और केजरीवाल उनकी आवाज़ सरकार तक पहुंचाएंगे.

इस रिपोर्ट में जिक्र है, केजरीवाल ने लगभग 156 दिन जेल में बिताए, जबकि सिसोदिया करीब 530 दिन तक जेल में रहे. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को जमानत दी थी. अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में आंतरिक विरोधाभास हैं, जिससे साजिश का आरोप टिक नहीं पाया.

आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी भी लंबित है, जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है.

Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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